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अब बच्चों की एबिलिटी जानने के लिए डीएमआईटी
पैरेंट्सकी यह ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा टैलेंटेड हो, क्रिएटिव हो और क्लास में अव्वल आए। बच्चे की खूबियां और उसकी काबिलियत का पता कम उम्र में ही चल जाए तो उसे सही दिशा में आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे पैरेंट्स अब अपने बच्चों का डर्मेटोग्लायफिक्स मल्टीपल इंटेलीजेंस टेस्ट (डीएमआईटी)
करा रहे हैं। पाम, टोज़ , स्किन और फिंगर प्रिंट के द्वारा होने वाले इस टेस्ट के जरिए बच्चों की यूनिक डेवलपमेंटल पोटेंशियल का पता लगाया जाता है। इससे उसके टैलेंट के बारे में पता चलता है। इस टेस्ट की रिपोर्ट यूएस, बैंगलुरू और नासिक में तैयार होकर ऑनलाइन मिलती है। इसमें कम से कम तीन दिन का समय लगता है।
लर्निंगएबिलिटी की जानकारी मिलती
फिंगरप्रिंट स्कैनर से फिंगर प्रिंट टेस्ट लिया जाता है। स्कैनर कम्प्यूटर से जुड़ा रहता है। इसमें दसों फिंगर्स और दोनों थम्ब्स का टेस्ट किया जाता है। आम तौर एक बार में टेस्ट पूरा हो जाता है लेकिन कई बार दो से तीन टेस्ट लेना पड़ते हैं।
ब्रेन और फिंगर प्रिंट एक साथ होते हैं डेवलप
डॉक्टर ईशा सिंह कहती हैं कि यह एक ब्रेन चैकर टेस्ट है। ज्यादातर पैरेंट्स बच्चों के व्यवहार और इंटेलीजेंस के बारे में पता कर रहे हैं। इन दिनों शहर में तीन कम्पनी यह टेस्ट कर रही हैं। 13वें 18वें हफ्ते में बच्चा पेट में होता तभी ब्रेन और फिंगर प्रिंट दोनों एक साथ डेवलप होते हैं। उसी आधार इंटेलीजेंसी पता की जाती है।
सुसाइड दर में आएगी कमी
पिछले साल पढ़ाई के प्रेशर में एक लाख से अधिक बच्चों ने सुसाइड किया था। इस टेस्ट से यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चा किस फील्ड मे बेहतर परफॉर्म करेगा। इससे पैरेंट्स बच्चे को बेहतर समझ सकेंगे और सुसाइड दर कम होंगी।
चार सौ साल पुराना साइंस
एक रिसर्च के मुताबिक ये चार सौ साल पुराना साइंस है। यह राइट लेफ्ट ब्रेन की स्टडी करता है। लेफ्ट ब्रेन एनालिटिक थॉट, लॉजिक, लैंग्वेज और साइसं एंड मैथ्स की एबिलिटी के बारे में और राइट ब्रेन होलिस्टिक फंक्शन, इंट्यूशन, क्रिएटिविटी और आर्ट-कल्चर के लिए उत्तरदायी होता है। यह टेस्ट बच्चे की डांसिंग, सिंगिंग, स्पोर्ट, मैथेमेटिक्स, बिजनेस और एजुकेशन की काबलियत के बारे में बताता है।
intelligence test
डॉ. ईशा सिंह डीएमआई टेस्ट करते हुए।