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गुरु का आशीर्वाद मिलना सबसे यादगार पल है

7 वर्ष पहले
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मुझेजिस समारोह में पुरस्कार मिला, उसी समारोह में मैंने अपने गुरु पंडित जसराज की बंदिश गाई। यह राग पूरिया धनाश्री में है। मैंने जब यह राग पूरा किया तब दो हजार लोगों ने खूब तालियां बजाईं। मेरी आंखों में आंसू थे। दूसरे दिन मैं अपने गुरु पंडित जसराज जी से मिला। उन्हें बताया। उनके पैर छुए। उन्होंने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। वे बहुत प्रसन्न थे। मेरे लिए यह ज़िंदगी केा यादगार पल था। यह कहना है शहर के शास्त्रीय गायक गौतम काले का। उन्हें ठाणे (मुंबई) में सुधीर फड़के युवोन्मेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

गुरुकी बंदिश गाकर पाई वाहवाही

सिटीभास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार मुझे 6 दिसंबर को ठाणे के समर्थ सेवक मंडल सभागृह में श्रीधर फड़के ने दिया। यह पुरस्कार पिछले 12 सालों से प्रतिभाशाली युवा शास्त्रीय गायक-गायिकाओं को दिया जाता है। पुरस्कार के बाद मुझे गायन के लिए सिर्फ दस मिनट का मिले। मैंने अपने गुरु का ध्यान करते हुए राग पूरिया धनाश्री में उन्हीं की बंदिश श्याम मुरारी बनवारी प्रस्तुत की। इसे खासा सराहा गया।

कईसंगीत सम्मेलनों में दे चुके हैं प्रस्तुति

गौतमकाले देश के तमाम संगीत सम्मेलनों में गायन प्रस्तुत कर चुके हैं। संगीत नाटक अकादमी के ग्वालियर में हुए प्रतिभा महोत्सव से लेकर उदयपुर के कुंभोत्सव में वे गा चुके हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, उदयपुर, जोधपुर, मुंबई जैसे शहरों में गायन कर चुके हैं। वे कहते हैं मैं 15 सालों से पंडित जसराज से तालीम हासिल कर रहा हूं और इंदौर में कल्पना झोकरकर से गायन सीख रहा हूं। मैं पंडित कुमार गंधर्व, पंडित भीमसेन जोशी, राशिद खां का गायन नियमित सुनता हूं।

गौतम काले

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