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अध्यापकों का पैसा चुनाव तक अटका

7 वर्ष पहले
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इंदौरजिले के अध्यापकों की हड़ताल अवधि के वेतन भुगतान का निर्णय अब नगर निगम आयुक्त करेंगे। डीईओ अपने नाम से शासन का आदेश नहीं होने के कारण वेतन को हरी झंडी नहीं दिखा रहे हैं।

अध्यापकों ने समान कार्य समान वेतन की मांग को लेकर पिछले साल 27 दिन का धरना दिया था। इसी अवधि के वेतन का भुगतान करने के शासन जुलाई में आदेश दे चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी की दलील है चूंकि आदेश में उनके नाम का अलग से उल्लेख नहीं है, इसीलिए वे इस पर पृष्ठांकन नहीं करेंगे। संकुल प्राचार्य भी डीईओ के आदेश के बिना वेतन नहीं निकाल रहे हैं।

शहरी स्कूलों के अध्यापकों के लिए नगर निगम नगरीय निकाय होने से जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले का निपटारा अब नगर निगम के जरिए ही करवाना चाहते हैं। डीईओ ने शासन के आदेश की कॉपी निगम आयुक्त को भेज कर उचित कार्रवाई के लिए लिखा गया है। शासन के आदेश में निगम आुक्त का नाम भी है। डीईओ द्वारा मामले में निगम आयुक्त को शामिल करने से इस पूरे मामले का सुलझना मुश्किल हो गया है। निगमायुक्त से अपर आयुक्त और फिर उपायुक्त तक फाइल पहुंचने में तीन माह का वक्त लग सकता है। संभव है कि अब यह वेतन नई परिषद के गठन के बाद ही मिल पाएगा। 500 अध्यापकों का भुगतान रुका हुआ है।

निगम आयुक्त को लिखा है

हां, अध्यापकों की हड़ताल अवधि के वेतन को लेकर हमने नगर निगम आयुक्त को हमने शासन के आदेश की कॉपी भेजी है। उनसे मामले में कार्रवाई करने के लिए लिखा गया है।

किशोरशिंदे, जिलाशिक्षा अधिकारी