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मटके में पाला दो मुंहा सांप, भाइयों के झगड़े में खुली पोल, एक को जेल

7 वर्ष पहले
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शहरके समीप ग्राम पिवड़ाय में एक व्यक्ति के पास से वन विभाग ने दो मुंह (चकलोर) का सांप मृत अवस्था में बरामद किया है। आरोपी ने घर में ही सांप को एक मटके में पाल रखा था। हुआ यूं कि मटका लुढ़क गया। सांप उसमें से बाहर निकला और आरोपी के पड़ोस में रहने वाले भाई के यहां चला गया। सांप को देखकर परिवार वाले घबरा गए। उन्होंने उसे मार डाला। इस बीच उसे पालने वाला अंबाराम गया। सांप को मरा हुआ देख वह शोर मचाने लगा कि मेरा 10 लाख रुपए का सांप मार दिया। यह सुन दूसरे पड़ोसी भी इकट्ठा हो गए। किसी ने इतनी देर में पुलिस को मुखबिरी कर दी। पुलिस ने सांप जब्त किया और वन विभाग को खबर कर दी। वन विभाग ने आरोपी अंबाराम को गिरफ्तार कर लिया। रविवार को ही उसे जिला कोर्ट में पेश किया, जहां से कोर्ट ने 28 सितंबर तक जेल भेज दिया।

रेंजर आरआर बिलगैया के मुताबिक आरोपी अंबाराम पिता शोभाराम के पास से लाल रंग का करीब डेढ़ किलो वजनी सांप मिला है।

इसे दो मुंह का सांप भी कहा जाता है। आरोपी सांप को बेचने की फिराक में था। पता चला है कि उसने कई जगह संपर्क भी किया था। डिप्टी रेंजर मुरलीमनोहर वर्मा, वन रक्षक प्रवीण चौहान उसे कोर्ट लेकर गए तो उसने कहा- प|ी भी सांप की देखभाल करती थी। फिलहाल वह मायके में है।

बढ़ रही सांप की तस्करी

अंबाराम

लक्ष्मी के वास का अंधविश्वास

वन्यप्राणी विशेषज्ञ अजय गड़ीकर का मत है कि इस दुर्लभ प्राणी को रखने के पीछे अंधविश्वास है कि इससे घर में लक्ष्मी का वास रहता है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। लोगों में यह भी भ्रांति है कि इस सांप के दो मुंह होते हैं। हकीकत यह है कि इसकी पूंछ हूबहू उसके मुंह जैसी होती है। मुंह के साथ ही पूंछ भी हरकत में ज्यादा रहती है, इसलिए इसे दो मुंह का सांप कहते हैं। यह सांप पूरे प्रदेश में पाया जाता है। जहरीला नहीं होता। मेंढक, चूहे और छोटे सांप खा लेता है। इसे जीव विज्ञान में रेड सेंड बुआ कहते हैं।

इस साल में यह चौथा मौका है जब दो मुंह के सांप को अवैध रूप से पाले जाने और बेचने के प्रयास में आरोपी पकड़े गए हैं। कंपेल, पिवड़ाय , नेमावर रोड क्षेत्र तरफ से ही मामले सामने रहे हैं। इसी तरह मॉनीटर लिजार्ड (गोह) की तस्करी भी शक्तिवर्धक तेल बनाने, मांस खाने के लिए हो रही है।