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भोपाल नहीं इंदौर में होगा हृदयरोगियों का इलाज
हृदयरोगी भूमिका का इलाज अब इंदौर में होगा।
निजी अस्पतालों की फिर होगी चांदी
2006से 2013 तक शासन से मान्यता प्राप्त िनजी अस्पतालों में बीमारियों का इलाज होता था। इसमें कई बार निजी अस्पताल संचालक छोटी बीमारी को बड़ी दिखाकर राशि वसूलते थे। इसमें निजी अस्पतालों की चांदी हो गई थी। सरकारी राशि मिलने मरीज का इलाज होने से परिजन भी किसी को शिकायत नहीं करते थे। अस्पतालों के फरेब लूट से बचने के लिए जनवरी 2014 से सरकार ने हृदय संबंधित बीमारियों के इलाज के भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज का निर्णय लिया था।
यहहै योजना
2006से शुरू हुई योजना के अंतर्गत 20 बीमारियों का इलाज होता है। इसमें 30 अगस्त 2014 तक 228 मरीजों का इलाज हुआ है। इसमें इलाज के लिए 75 से 2 लाख रुपए मिलते हैं। अब इंदौर में इलाज होने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ेगी। भोपाल में दूरी ज्यादा परेशानी होने से लोग इलाज के लिए नहीं जाते थे।
भास्कर संवाददाता|खरगोन
राज्यबीमारी सहायता निधि में जिले के हृदयरोगियों का इलाज अब भोपाल नहीं इंदौर में होगा। भोपाल में प्रदेशभर के मरीजों की ज्यादा संख्या और परेशानी होने के कारण लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग भोपाल ने यह निर्णय लिया है। हालांकि जिले के मरीजों की संख्या बहुत कम है। अब इंदौर में इलाज होने से मरीजों की संख्या बढ़ेगी।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कुछ दिनों पहले राज्य बीमारी में हृदयरोगियों का इलाज इंदौर के निजी अस्पताल में कराने का निर्णय िलया है। अवर सचिव डॉ. गनी अहमद खान के आदेश अनुसार संभाग के मरीजों को महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में रैफर किए जाएंगे। यहां से मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल में उनका इलाज होगा। क्योंकि कॉलेज में हृदयरोगी के पूरे इलाज की व्यवस्थाएं नहीं है। दो महीने से परेशान मोगरगांव निवासी धर्मेंद्र की सात वर्षीय भूमिका के दिल में छेद हैं। कलेक्टर नीरज दुबे ने भूमिका के प्रकरण को सीएमएचओ कार्यालय भेजा है। अब भूमिका का इलाज इंदौर में होगा। इसी कड़ी में सीएमएचओ कार्यालय में चार केस दर्ज हो चुके हैं।
लंबीप्रक्रिया से परेशान - जनवरीसे भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आठ माह में केवल 28 लोगों ने इलाज कराया है। लंबी प्रक्रिया अधिक दूरी के कारण ज्यादा मरीज भोपाल नहीं गए। जबकि जनवरी 2013 से दिसंबर तक