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फैक्टरी कर्मचारी ले सकेंगे 100 घंटे तक ओव्हर टाइम
प्रदेशके कारखानों में काम कर रहे लगभग 10 लाख कर्मचारियों को यह अच्छी खबर है। अब वे महीने में 100 घंटे तक का ओव्हर टाइम ले सकेंगे। अभी तक उन्हें 48 घंटे तक का ही ओव्हर टाइम लेने की पात्रता थी। राज्य सरकार इस नई व्यवस्था को लागू करने तीस साल बाद श्रम कानूनों में परिवर्तन करने जा रही है। इस मामले को आगामी कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। यह बदलाव केंद्रीय कानून में राज्य सरकार को मिले अधिकारों के तहत किए जा रहे हैं। इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
राज्य सरकार अक्टूबर में इंदौर में होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले श्रम कानूनों को सरल करना चाहती है, ताकि प्रदेश में इंवेस्टर्स को उद्योग लगाने में श्रम कानूनों से संबंधित दिक्कतें आए। इसके लिए इंस्पेक्टर राज पर खात्मा लगाया जाना है। इसके तहत उद्योगों में पांच साल तक इंस्पेक्टर निरीक्षण नहीं कर सकेंगे। उद्योगपति स्वयं सेल्फ असेस्मेंट कर सरकार को देंगे। अभी तक लेबर इंस्पेक्टर के आकस्मिक निरीक्षण से कारखानों के मालिकों को दिक्कतें होती थी। इसकी राज्य सरकार से भी शिकायतें की गई थी।
कारखाने में तीन सौ कर्मचारी होने पर ही प्रबंधन को उनकी छटनी या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर सरकार से अनुमति लेना होगी। इससे कम संख्या होने पर कारखाना प्रबंधन को कार्रवाई के अधिकार थे। अभी तक यह संख्या 100 थी। इससे कर्मचारी की संख्या एक भी ज्यादा होने पर ट्रेड यूनियन औद्योगिक विवाद अधिनियम-1948 के प्रावधानों के अनुसार श्रम न्यायालयों की शरण ले लेती थी। इसके अलावा ट्रेड यूनियन एक्ट में भी बदलाव किया जाया जाना प्रस्तावित है। इसके तहत ट्रेड यूनियन में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पदाधिकारी होने की पात्रता नहीं होगी। अभी तक ट्रेड यूनियन के 50 फीसदी पदाधिकारी सेवानिवृत्त होते थे। नई व्यवस्था में नौकरी कर रहे कर्मचारी को ही ट्रेड यूनियन में शामिल होने की पात्रता होगी।