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छात्र की पहचान हो इसलिए फोटो मिक्सिंग कर देते थे
जेलमें बंद यह दोनों अपराधी परीक्षा में पास करवाने का कांट्रैक्ट लेते हैं। जिस छात्र को परीक्षा देना है उससे ओरिजनल दस्तावेज लेकर उसके नाम पर किसी और व्यक्ति को परीक्षा में बैठा देते हैं। ऐसे में परीक्षा में बैठने वाले छात्र के सारे दस्तावेज ओरिजनल लगाए जाते थे, लेकिन फोटो स्कोरर का होता था। कई बार दोनों के फोटो को मर्ज कर एक फोटो बना देते। ऐसे में पहचान करना मुश्किल हो जाता। व्यापम से रोल नंबर जारी होने से लेकर परीक्षा हाल में परीक्षा देने तक कोई भी परीक्षा देने वाले स्कोरर को चैलेंज नहीं कर सकता है, क्योंकि फोटो भी उसके ही जैसा होता है। इस तरह दो दर्जन से ज्यादा लोगों को परीक्षा पास करवा दिया है। एआईटी अब ग्वालियर जेल में बंद शर्मा और त्रिपाठी को इंदौर लाने की तैयारी रही है।
ऐसेकरते है फर्जीवाड़ा
पीएमटीमें पास करवाने वाले यह लोग अन्य राज्यों से मेरिटोरियस स्टूडेंट्स की जानकारी निकालते हैं। फिर इनसे स्कोरर बन मप्र में परीक्षा देने के लिए इन्हें एक बड़ा एमाउंट दिया जाता है। परीक्षा देने वाले छात्रों से दलाल के माध्यम से संपर्क कर पास करवाने की बात करते हैं। छात्र के ऑरिजनल दस्तावेज ले लिए जाते हैं। इन दस्तावेजों में स्कोरर का फोटो लगा दिया जाता है।
^आरोपी लानेके बाद कई जानकारियां मिलेंगी
जगतसिंह के गिरफ्त में आने के बाद शर्मा और त्रिपाठी की जानकारी मिली है। इन दोनों को भी ग्वालियर जेल से हम ला रहे हैं। इनसे पूछताछ के बाद कई खुलासे हो सकते हैं।
अजयजैन, डीएसपी,एसआईटी, इंदौर