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कैरेक्टर्स के थ्रू एक्टिंग करते एनिमेटर्स

7 वर्ष पहले
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एकचिड़िया जो उड़ने वाली है उसे कोई आम शख्स डाली पर बैठा देखेगा और फिर आसमान में उड़ता देखेगा। जबकि एनिमेटर्स देख सकेंगे कि उड़ने से पहले चिड़िया ने पैरों को मोड़ा, गर्दन झुकाई, पंख पीछे कए फिर उड़ान उड़ान भरी। एनिमेटर्स निगाह अलग ही रहेगी। आम फिल्मों से अलग एनिमेशन फिल्म में अपने बनाए कैरेक्टर्स के ज़रिए एनिमेटर ही एक्टिंग करता है। जिस तरह उसके किरदार हंसते हैं, रोते हैं, सब एनिमेटर के ही अंदाज़ होते हैं।

यह कहते हैं नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म रॉक ऑन और तारे ज़मीन पर का टाइटल एनिमेशन बनाने वाले नामी एनिमेटर अरविंद चुड़ासमा ने। एरीना एनिमेशन इंस्टिट्यूट में वे क्ले एनिमेशन वर्कशॉप लेने आए थे।

हरबात को देखो अलग नज़र से

एनिमेशनविजुल्स के ज़रिए संवाद करना है। यह आर्ट, फिलॉसफी और तकनीक का बैलेंस्ड मिक्स है। यंग एनिमेटर्स से मैं कहूंगा कि कड़कती बिजली से लेकर बारिश की बूंदों तक हर चीज़ को अलग नज़र से देखें। हाथी खड़ा रहता है तो उसक जेश्चर कैसा होता है। सूंड हिलाता है तो कान हिलते हैं या नहीं। ऑब्ज़र्व करें। आसपास सबकुछ है। चाहिए बस वह निगाह जो हमेशा कुछ खोजती रहे, सीखती रहे।

कार्टून्स तक सीमित नहीं एनिमेशन

कईलोग जिन्हें जानकारी नहीं है, वे एनिमेशन को रंग-बिरंगे किरदारों तक ही सीमित समझते हैं। जबकि एनिमेशन एजुकेशन से लेकर सेना और मेडिकल ट्रीटमेंट्स में भी यूज़ हो रहा है। हालांकि इसे बहुत आसान या सिर्फ क्रिएटिव समझकर इस फील्ड को चुनें। बहुत पेशेंस और तसल्ली का काम है यह। तकनीकी भी है। खुद का इंट्रेस्ट और कैपेबिलिटी परखकर ही इस फील्ड में आएं क्योंकि यह फील्ड बहुत क्रिएटिविटी की मांग करती है।

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