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बिल्डिंग ऐसी जो खुद बनाएगी बिजली

7 वर्ष पहले
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एकऐसी बिल्डिंग जो खुद इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करेगी वह भी ईकोफ्रेंडली तरीकों से। मौसम के मुताबिक कभी वॉटर, कभी विंड और कभी सोलर एनर्जी से यह बिल्डिंग इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करेगी। फ्यूचर बिल्डिंग की ऐसी डिज़ाइन बनाई शहर के एक यंग इनोवेटर मुक्तांश जैन ने और यह हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी ऑफ कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट के एक कॉन्टेस्ट में तीन फाइनल डिज़ाइंस में भी चुनी गई।

इस कॉन्टेस्ट में पूरी दुनिया से 1200 इनोवेटर्स ने डिज़ाइंस सबमिट किए थे। भारत से इस कॉन्टेस्ट में कुल 50 एंट्रीज़ गई थीं। हाल ही में मुक्तांश लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और यूनिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुके हैं। बॉम्बे वर्ली सी लिंक की तर्ज पर आइसक्रीम स्टिक्स से बनाया गया उनका लॉन्गेस्ट ब्रिज एक रिकॉर्ड है।

यहप्रेज़ेंट की जरूरत है

मुक्तांशबताते हैं कि ग्रीन आर्किटेक्चर के साथ नेचरल एनर्जी को यूज करना भविष्य नहीं वर्तमान की ज़रूरत है। मैंने जो डिज़ाइन प्रपोज़ किया उसमें बारिश के दिनों में पानी के प्रेशर, सूरज की रोशनी और हवा की गति को इस्तेमाल करते हुए टर्बाइन रोअेट किया बिजली बनाई। ये कॉन्सेप्ट बिलकुल प्रैक्टिकल है और आम घरों में यह सेटअप लगाना मुमकिन है। पानी को डायगोनली फ्लो करेंगे तो प्रेशर ज्यादा मिलेगा। बारिश के दिनों में वॉटर एनर्जी से इलेक्ट्रिसिटी जनरेट कर सकेंगे, गर्मी में धूप से और आम दिनों में विंड एनर्जी से। बिल्डिंग बनाने के लि हाई डेनसिटी कॉन्क्रीट का इस्तेमाल करना होगा।

आइसक्रीम स्टिक्स से बना ब्रिज फीट पर 80 किलो वेट उठा लेगा

बॉम्बेवर्ली सी लिंक की तरह बना यह ब्रिज आइसक्रीम स्टिक्स से बनाया गया है, लेकिन यह इस तकनीक से बनाया गया है कि हर एक फीट पर यह 80 किलो का लोड ले सकेगा। मुक्तांश ने बताया कि हमने प्रैक्टिकली भी यह प्रूव किया। हमारा मकसद यह बताना था कि तकनीक सही तो कम कॉन्क्रीट में भी ज्यादा ड्यूरेबल डिज़ाइन बनाना नामुमकिन नहीं है।

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