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समय सीमा हो जाने के बाद बढ़ाई गई है मियाद

6 वर्ष पहले
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बायपासबनाने वाली कंपनी गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड का कहना है कि बैंक से जब तक पैसा नहीं मिलता काम में गति नहीं आएगी। कंपनी ने जून 2015 तक काम पूरा करने की मोहलत मांगी है। हालांकि काम इतना ज्यादा बाकी है कि इस अवधि में भी पूरा नहीं हो सकेगा। वैसे भी प्रोजेक्ट की मियाद 2014 में खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद एक साल से कछुआ चाल से काम चल रहा है। अभी तक 39 किलोमीटर ही सड़क बनी है। कंपनी के इस काम पर इंदौर कमिश्नर भी नाराजगी जता चुके हैं। कंपनी को 2010 में बायपास बनाने का कांट्रेक्ट मिला था।

सितंबर में कंपनी ने काम शुरू किया। तब इसे 30 माह में काम पूरा करके देना था, लेकिन कंपनी ने ध्यान नहीं दिया। काम की गति शुरुआत से ही धीमी रही है। कंपनी ने इसके पीछे तर्क यह दिया की जिला प्रशासन ने हमें जमीन उपलब्ध नहीं कराई इसलिए काम नहीं हो सका। जबकि हकीकत यह है कि जितनी जमीन कंपनी को सड़क बनाने के लिए पहले से मिली है उस पर ही व्यवस्थित निर्माण नहीं किया गया है। डीबी स्टार ने गायत्री प्रोजेक्ट के काम की गति जांचने के लिए 45 किलोमीटर पर हुए निर्माण देखे। इसमें सामने आया की कंपनी को 12 फ्लाय ओवर बनाने थे लेकिन यह भी पूरे नहीं हुए हैं। जो बना दिए हैं उन पर कनेक्टिविटी शुरू नहीं की गई है।

बायपासअधूरा, पर टोल पूरा

निर्माणकर रही कंपनी आधे अधूरे बायपास पर टोल टैक्स लगाकर करोड़ों रुपए की वसूली कर रही है। नियमानुसार निर्माणाधीन सड़क पर टोल नहीं वसूला जा सकता।

7फ्लाय ओवर नहीं बनेे

कंपनीको 45 किलोमीटर पर 19 फ्लाय ओवर बनाना हैं लेकिन अभी तक सिर्फ 12 ही बने हैं। कंपनी ने चालाकी कर भोपाल से देवास और इंदौर को जोड़ने वाले रास्ते के ब्रिज ही बनाए हैं जिससे कभी निरीक्षण हो तो काम चलता दिखे, जबकि भिचौली मर्दाना और राऊ के ब्रिज का काम अब भी अधूरा है। यही हालात मांगल्या के पास के हैं यहां भी ब्रिज का सिर्फ ढांचा है लेकिन काम बंद है।