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एसडीएम नहीं करते फाइनल बाउंड ओवर

6 वर्ष पहले
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एसडीएम नहीं करते फाइनल बाउंड ओवर

^गुंडोंपर फाइनल बांड ओवर के लिए कमिश्नर, कलेक्टर से तीन बार बात की। फिर भी हालत जस के तस है। 215 गुंडों पर कार्रवाई की जानकारी ले रहे हैं। एसडीएम फाइनल बाउंड ओवर नहीं करते। यह नहीं किया जाएगा, तब तक कानून का डर गुंडों में नहीं दिखेगा। -विपिनमाहेश्वरी, आईजी

थाना प्रभारी नहीं आते बयान देने

^धारा122 के प्रकरणों की हमने समीक्षा की थी लेकिन इतनी संख्या मेरी जानकारी में नहीं हैं। मैं इसे चेक करवा लेता हूं। हमने जनवरी तक 704 बदमाशों के फाइनल बांंड ओवर किए और 57 पर धारा 122 के उल्लंघन की कार्रवाई की। इन मामलों में टीआई के बयान सबसे जरूरी होते हैं। एसडीएम की शिकायत है कि टीआई बयान देने नहीं आते। हमारा कहना है पुलिस को जिन गुंडों का फाइनल बाउंड ओवर करना है वे इस संबंध में बात कर लें। हम फिर भी देखेंगे कि एसडीएम टीआई का सामंजस्य बेहतर हो। -आकाशत्रिपाठी, कलेक्टर

बांड तोड़ने वाले गुंडे

जिलासंख्या

इंदौरपूर्व 51

इंदौरपश्चिम 126

धार6

झाबुआ0

आलीराजपुर5

खरगोन5

खंडवा2

बड़वानी1

बुरहानपुर19

कुल215

हत्या करने वाले को भी बख्शा

एसपीआबिद खान ने बताया पिछले दिनों किशनगंज में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या हुई थी। हत्या करने वाले मो. सोहेल पर 12 अपराध थे और पुलिस ने उसे जिलाबदर करने का प्रस्ताव भेजा था। एसडीएम ने उसे जिलाबदर करने की बजाए एक लाख का बांड ओवर कर दिया। इसका उल्लंघन करते हुए उसने हत्या कर डाली। हम पत्राचार करते रह गए लेकिन उसकी बांड राशि तक जब्त नहीं हुई।

क्या है बांड की अहमियत

पुलिसआदतन अपराधियों पर धारा 107-16 के तहत बांड भरवाने के लिए प्रकरण संबंधित एसडीएम कोर्ट में पेश करती है। नियमानुसार एसडीएम को कम से कम 3 साल के लिए बांड ओवर करना चाहिए। इसकी राशि भी ज्यादा हो। ऐसे में अगर गुंडा बांड तोड़ता है तो राशि जब्त होती है और बाकी अवधि के लिए उसे जेल में रहना पड़ता है।