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पारंपरिक शृंगारिक चित्रों में झलकता अलौकिक प्रेम
हलके-कोमल रंगों मे खिलता प्रेम
इनचित्रों में सटीक रेखाओं में लय है। इसी लय में आकार रूपायित होते हैं। विषयानुसार रंग योजना है, हल्के-कोमल रंगों में। इन्हीं रंगों में प्रेम खिलता है। ये शृंगारिक हैं। इनमें मीराजी का रचनात्मक धैर्य और कौशल देखा जा सकता है। इन चित्रों में गरिमा की आभा है। प्रेम का गहन भाव। सिटी भास्कर से खास बातचीत में वे कहती हैं शुरुआत से ही फिगरेटिव आर्ट के प्रति मेरा सहज झुकाव रहा है। इंदौर और ग्वालियर से कला की शिक्षा लेने के बाद मैंने पारंपरिक शृंगारिक कला को अपना ध्येय माना।
retrospective
सिटीरिपोर्टर } सुकुमारकृष्ण हैं, छरहरी देह, लंबी उनींदी आंखें, सिर पर मोर पंख, पीली धोती, लहराता सफेद दुपट्टा। राधा है, प्रेम में आंखें बंद किए, कृष्ण के दाएं कांधे पर हौले से अपना सिर रखे। सफेद साड़ी पर नाज़ुक करधनी है। नीचे खिले पीले फूल चित्र को कोमलता देते हैं। केंद्र में दोनो के बीच एक अलौकिक गहन प्रेम सफेद हलके नीले प्रकाश में खूबसूरती से प्रकट है। यह शृंगारिक चित्र है शहर की 78 वर्षीय चित्रकार मीरा गुप्ता का। उनके इसी तरह के 70 चित्रों की 15 दिनी एक्ज़ीबिशन रेट्रोस्पेक्टिव भारत भवन (भोपाल) में शुक्रवार से शुरू हो रही है।