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पीएस ने कहा- जिला जेल से ज्यादा असुरक्षित है सेंट्रल जेल
सेंट्रलजेल में जब तक दूसरी सुरक्षा वॉल तैयार नहीं होती तब तक सात वाच टॉवर और एसएएफ के गार्ड से सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। ये प्रस्ताव सोमवार को इंदौर में जिला जेल और सेंट्रल जेल का दौरा करने आए प्रमुख सचिव जेल पी.सी. मीणा के सामने रखा गया। प्रमुख सचिव ने दो घंटे जिला जेल का निरीक्षण किया। इसके बाद वे सेंट्रल जेल पहुंचे और जेल में हुई घटना जेल की हर व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने खामियों को नोट कर शासन स्तर इन्हें दूर करने की बात कही।
प्रमुख सचिव ने जिला जेल की तुलना में सेंट्रल जेल को ज्यादा असुरक्षित माना। उन्होंने जेल में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम और बल की कमी की भी जानकारी ली। मीणा ने बताया जिला जेल में उन्होंने मुलाकातियों के लिए एक अलग से सॉफ्टवेयर तैयार कर भीड़ को कम करने का प्रस्ताव बनवाया है। साथ ही जेल के बाहर भीड़ की अव्यवस्थाओं को देखते हुए मुलाकातियों के लिए बैठक व्यवस्था के इंतजाम की बात कही है। इसी के साथ कैदियों की वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से पेशी की व्यवस्था की गुणवत्ता को और बेहतर ढंग से करने के लिए शासन स्तर पर बात करने का बोला।
जेल की दीवार की ऊंचाई और कैदियों की संख्या को बताया खतरनाक
जेल अधीक्षक गोपाल ताम्रकर ने बताया पीएस दोपहर पौने चार बजे सेंट्रल जेल पहुंचे। यहां उन्होंने जेल की हर बैरक, कारखाने, दीवार बाहरी सुरक्षा का निरीक्षण किया। वृद्ध, बीमार कैदियों से मिले और खाना भी खाकर देखा। मीणा ने निरीक्षण के दौरान जेल की 15 फीट ऊंची दीवार और सुरक्षा के लिए तैनात प्रहरियों की संख्या को लेकर चिंता जताई। उन्होंने पूरी जेल को ही असुरक्षित माना और कहा कि जेल मैन्युअल के हिसाब से दीवार की हाइट 21 फीट और पांच कैदियों पर एक प्रहरी की व्यवस्था होनी चाहिए। पूरे निरीक्षण के बाद जेल अधीक्षक ने पीएस के समक्ष प्रस्ताव रखा कि जब तक जेल की दूसरी वाॅल तैयार नहीं होती तब तक जेल में सात वाच टॉवर बनाने और उन पर एसएएफ के गार्ड की तैनाती का एक प्रस्ताव दिया। जिसे उन्होंने शासन स्तर पर बात कर लागू करने की सहमति दी।
सजा के बाद कैदियों को दिलाएं लोन
पीएसने जेल कैदियों के लिए सजा पूरी होने के बाद रोजगार की व्यवस्था पर कहा कि उन्हें जेल से छूटने के बाद बैंक लोन दिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि वे दोबारा अपराध करें, बल्कि जेल में सीखे काम से खुद क