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एनआईए के खिलाफ परिवाद, कहा- जुर्म कबूलने के लिए यातना देते थे अफसर
समझौताब्लास्ट के कथित आरोपी कमल चौहान द्वारा एनआईए के खिलाफ दायर किए गए निजी परिवाद पर सोमवार को देपालपुर कोर्ट में बयान हुए।
चौहान ने बयान में कहा कि उसे एनआईए एसपी विशाल गर्ग ने 10 फरवरी 2012 को देपालपुर से उठाया, लेकिन गिरफ्तार करना नोएडा से बताया गया। यही नहीं एनआईए ने सालभर मुझे गलत तरीके से हिरासत में रखा। जुर्म कबूल करने के लिए मेरी दाड़ी के बाल खींचे जाते थे, रात-रातभर जगाकर रखा जाता था। एनआईए के अफसरों ने मुझे जानबूझकर वारदात में फंसाने की कोशिश की। मैं जबरन जुर्म कबूल कर लूं, इसके लिए मुझे तरह-तरह से प्रताड़ित भी किया गया। मैंने निर्दोष होने की बार-बार बात कही, लेकिन वे नहीं माने। चौहान की तरफ से एडवोकेट अमित सिसौदिया ने पैरवी की। सिसौदिया ने कहा कमल को एक साल तक एनआईए ने कस्टडी में रखा, लेकिन ब्लास्ट से जुड़ा एक भी तथ्य साबित नहीं हो पाया। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में भी एनआईए की शिकायत की गई थी। खुद एनआईए की तरफ से यह जवाब आया है कि चौहान को उसने गिरफ्तार किया था और लंबे समय तक कस्टडी में रखा था। परिवाद में एनआईए के अधिकारियों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज करने की मांग की गई है। अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।
समझौता ब्लास्ट मामला