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महिलाओं के मामले की महिला जज सुनवाई करे ऐसा प्रावधान नहीं : शासन
ई-अटेंडेंसमामले की सुनवाई हाई कोर्ट में किसी महिला जज से करवाने के मामले में शुक्रवार को शासन ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि महिलाओं से जुड़े मामले की सुनवाई महिला जज ही करे। यह व्यवस्था समय का पाबंद बनाने के लिए की गई है। इसमें निजता हनन जैसा कोई मसला नहीं है। शासन पहले ही इस बारे में बता चुका है।
300 महिला शिक्षिकाओं ने हाई कोर्ट में आवेदन लगाकर महिला जज से सुनवाई करवाने की मांग की है। कोर्ट इस आवेदन पर सोमवार को फैसला देगी। अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज द्विवेदी ने शासन की तरफ से कहा कि ई-अटेंडेंस योजना से स्कूलों में समय पर पढ़ाई शुरू होगी। शेड्यूल सुधरेगा। एक गैर सरकारी संगठन ने भी प्रदेश में स्कूलों के खुलने, बंद होने के मामले में रिपोर्ट पेश की है। इसमें शिक्षकों का समय पर नहीं आना हर जगह मिला। शासन के तर्क सुन हाई कोर्ट ने कहा कि शासन महिलाओं के आवेदन पर बिंदुवार जवाब पेश करे। महिला शिक्षकों ने आवेदन में लिखा है कि ई-अटेंडेंस के लिए निजी नंबर सार्वजनिक करना होगा। यह तमाम कर्मचारियों में बंट जाएगा। मोबाइल पर आपत्तिजनक सामग्री, मैसेज आने की संभावना रहेगी। शिक्षिका की हर लोकेशन पता चल जाएगी। संभागायुक्त संजय दुबे भी सुनवाई के दौरान मौजूद थे।
बंद रखें मोबाइल
सुनवाईके बाद संयुक्त संचालक लोक शिक्षण के.के. पांडे ने मीडिया से कहा कि महिला शिक्षिकाओं को पूरे समय मोबाइल चालू रखने की जरूरत नहीं हैं। स्कूल में आने के समय उपस्थिति दर्ज करवाने के बाद वे मोबाइल बंद कर दें। स्कूल से जाने के समय मोबाइल चालू कर लें पंच लगा दें और फिर बंद कर दें। इससे उनकी निजता में दखल नहीं होगा।