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तेंदुए का सुराग नहीं लगा पाया वन विभाग का कुत्ता जैकी
रेडियोकॉलोनी में दिखे तेंदुए का सुराग वन विभाग का प्रशिक्षित खोजी कुत्ता जैकी भी नहीं लगा पाया। तीनों दिन वह नगर निगम के प्रोटोकॉल अफसर अशोक राठौर के आंगन और पीछे हॉकी मैदान की बाउंड्रीवॉल से आगे नहीं बढ़ पाया। जैकी केवल तेंदुए को सर्च करने में एक्सपर्ट है।
दरअसल, जैकी की सेवाएं वन विभाग ने तेंदुआ दिखने के सात दिन बाद ली। तब तक तेंदुए की गंध लगभग मिट चुकी थी। जैकी ने लगभग डेढ़ किमी के दायर में सर्चिंग की थी। तीनों दिन उसने सर्चिंग की शुरुआत बड़ी मुस्तैदी से की थी। वह अपनी गाड़ी से निकलकर सीधे राठौर के आंगन में भागता। वहां सूंघता और दीवार पर चढ़ने की कोशिश करता, लेकिन इसके बाद वह ठंडा पड़ जाता। सीसीटीवी कैमरे में जहां तेंदुआ दिखा वहां भी उसे ले जाया गया, लेकिन वह तेंदुए के जाने की दिशा को पकड़ नहीं पाया। तीन दिन में सफलता नहीं मिलने पर उसे भोपाल भेज दिया गया।
24 घंटे में लाते तो परिणाम मिलते
जानकारोंका कहना है कि तेंदुआ दिखने के 24 घंटे के भीतर जैकी को लाया जाता तो संभवत: अच्छे परिणाम मिल जाते। इस अवधि में तेंदुए की गंध मौजूद रहती। जैकी उस दिशा तक ले जाता जहां तेंदुआ गया होगा। सात दिनों में झाड़ू लगना, पानी से सफाई, मनुष्यों की चहलकदमी होने से तेंदुए की गंध मिटना लाजमी है।