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between the lines

7 वर्ष पहले
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चुनावी माहौल और

सुस्त से अध्यक्ष महोदय

शाह शहर में आए तो उम्मीदें लिए स्वागत करने पहुंचने वालों की भीड़ जमा हो गई। निगम चुनावों से पहले यह मौका दम दिखाने का था, लेकिन बुरा हो दिल्ली से तय हुई कई सारी गाइडलाइंस का जिन्होंने पोस्टर, बैनर और झोले-झंडे से दम दिखाने का मौका ही नहीं दिया। इंदौरी उम्मीदवार फिर भी उम्मीदें कायम रखे हुए थे, लेकिन बाकी कसर स्थानीय स्तर पर बनी गाइडलाइन ने पूरी कर दी। इतनी जद्दोजहद के बाद भी कुछ नेता शाह तक पहुंचकर कुछ बोलने में कामयाब रहे। उन्हें इस बात की मायूसी रही कि शाह ने बिलकुल अजनबियों की तरह व्यवहार किया। बाद में भले सफाई दी जाती रही कि शाह का मूड और तबीयत दोनों ही ठिकाने पर नहीं थे। शाह जिन इंदौरी नेताओं को अच्छी तरह जानते हैं, वो यानी ताई और भाई दोनों ही मौजूद नहीं थे और जो मौजूद थे, उनको शाह पहचानते थे और पहचानने में रुचि ले रहे थे। जिस तरह लाइन लगाकर उनका स्वागत किया गया, वह भी इंदौरी भाजपाइयों के लिए नया अनुभव था। पूरे शो में अकेले सुदर्शन ऐसे रहे, जिनके चेहरे पर शाह ने कुछ देर नजरें इनायत की और चुनरी यात्रा के निमंत्रण का जवाब भी सकारात्मक तरीके से दिया। {खबरची