- Hindi News
- शासन के आदेश पर भी नहीं दी जा रही है 27 दिनों की तनख्वाह
शासन के आदेश पर भी नहीं दी जा रही है 27 दिनों की तनख्वाह
शासन ने आंदोलन वाले 27 दिनों का वेतन अध्यापकों को देने का निर्देश दे दिया है, लेकिन अब भी अटका हुआ है।
महू नाका स्थित डीईओ कार्यालय।
डीबी स्टार इंदौर
अध्यापकोंका आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन इस अवधि का वेतन पाने के लिए अध्यापक अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने 8 जुलाई को अध्यापकों की हड़ताल अवधि के वेतन के भुगतान को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, लोक शिक्षण आयुक्त, समस्त कलेक्टर और समस्त जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आदेश जारी किए थे। अवर सचिव अमरनाथ दुबे द्वारा जारी आदेश में लिखा है शासकीय कर्मचारी संघों की मांगों के हड़ताल अवधि का अर्जित अवकाश/अन्य अवकाश में स्वीकृत किए जाएं। शासकीय अध्यापक संवर्ग के कर्मचारियों को भी हड़ताल अवधि का वेतन दिया जाए।
साइनपर आकर टिकी सूई
जिलाशिक्षा अधिकारी की दलील है कि इस संबंध में जारी शासन का आदेश उनके नाम नहीं है। प्रतिलिपि में भी इस बात का जिक्र नहीं है। यही वजह है कि वे आदेश पृष्ठांकन को तैयार नहीं हैं। अगर आदेश में उनका भी नाम शामिल हो तो वे इसे मान्य करेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश को इंडोर्स ना करने से संकुल प्राचार्य वेतन स्वीकृत नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है जिला शिक्षा अधिकारी आदेश पर अपने दस्तखत के साथ लिखकर दें तो हमें वेतन देने में कोई परेशानी नहीं है। अगर अध्यापकों की औसत तनख्वाह 15 हजार रुपए आंकी जाए तो इस मान से 500 अध्यापकों को 27 दिन की तकरीबन 70 लाख रुपए की राशि का भुगतान होना है।
ग्रामीणक्षेत्र के अध्यापक खुश
शहरीस्कूलों के अध्यापक भले ही हड़ताल अवधि के वेतन को लेकर परेशान हों, लेकिन आंदोलन में शामिल इंदौर (ग्रामीण) के अध्यापकों का वेतन काफी पहले जारी हो गया है। ग्रामीण क्षेत्र के तकरीबन 90 फीसदी संकुलों ने शासन के आदेश के आधार पर वेतन निकाल दिया। शेष संकुल शहरी क्षेत्र के समान डीईओ के दस्तखत को लेकर उलझे हुए हैं। हालांकि आदेश की प्रतिलिपि ग्रामीण क्षेत्र के समस्त संकुलों को भेजी गई है।
नहींरखते अवकाश का लेखा-जोखा
अधिकांशसंकुल प्राचार्य कार्यालयों में अध्यापक संवर्ग के अवकाश का लेखा-जोखा नहीं रखा जाता। इसके साथ ही लेखा पत्रक की सेवा पुस्तिका में भी अवकाश प्रविष्टि पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होते। इसका संधारण करने वाले कर्मचारी जानबूझकर जानक