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व्यापमं अफसर भी संदेह के घेरे में

7 वर्ष पहले
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इंदौरमें एसटीएफ के निर्देशन में काम कर रही एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) के अनुसार तीनों प्रमाण-पत्रों को देखने के बाद प्रदेशस्तर पर फर्जी प्रमाण-पत्र जारी करने वाले रैकेट का खुलासा हो सकता है। मप्र के इंदौर, बैतूल, जबलपुर, आलीराजपुर जैसे शहरों से बने प्रमाण-पत्र संदेह के घेरे में हैं।

फर्जी मूल निवासी प्रमाण-पत्र के आधार पर पीएमटी में एडमिशन लेने वाले अन्य छात्र ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर के कॉलेजों में भी पढ़ रहे हैं। एसटीफ अब तक फर्जी परीक्षार्थियों और पैसा देकर एडमिशन पाने वालों को तलाश रही थी। फर्जी मूल निवासी प्रमाण-पत्र का मामला सामने आने के बाद पीएमटी कांड में एक नया स्कैंडल सामने रहा है।

व्यापमंकी बड़ी लापरवाही

फर्जीमूल निवासी प्रमाण-पत्र मामले में भी व्यापमं के अफसर संदेह के घेरे में हैं। हर छात्र का रिकॉर्ड जांचने का काम व्यापमं की बनाई गई स्क्रूटनी कमेटी का है। सवाल यह उठता है की व्यापमं के अफसरों ने प्रमाण-पत्र देखे ही नहीं या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया।

एसटीफकी मॉनिटरिंग में इंदौर की एसआईटी

इंदौरमें एसटीफ की मॉनिटरिंग में एसआईटी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम काम कर रही है। इसमें एक एडीशनल एसपी, चार डीएसपी हैं। एसआईटी अब तक ग्वालियर, जबलपुर अन्य शहरों से फर्जी छात्रों और पीएमटी के स्कोरर्स को पकड़ा है। इस टीम को पीएमटी घपले में इस नए स्कैंडल का पता लगा है। अब इस मामले में भी कई लोग फंस सकते हैं। छात्रों पर भी संकट आना है।