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जिन्होंने पढ़ाया, उन्हीं के नाम के सम्मान से अभिभूत हूं : लोकवानी

7 वर्ष पहले
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जिन्होंने मुझे पढ़ाया, जिनका मार्गदर्शन पाकर मैं यहां तक पहुंचा। आज उन्हीं डॉ. एस.के. मुकर्जी के नाम स्थापित सम्मान से मुझे नवाजा जाना मेरे लिए गर्व की बात है। यह बात वरिष्ठ चिकित्सक और जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. डी.पी. लोकवानी ने कही।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित डॉ. मुकर्जी स्मृति चिकित्सा सेवा सम्मान समारोह में डॉ. लोकवानी ने कहा- जब डॉ. मुकर्जी का निधन हुआ था तब मैं जूनी इंदौर मुक्तिधाम में था। मैंने देखा कि उनके पार्थिव शरीर पर ढंका कपड़ा पैरों से हट गया। मैंने तुरंत उस कपड़े से दोबारा उनके पैरों को ढंका और पैर छूकर अंतिम आशीर्वाद लिया। उस समय मैं अपने आंसुओं को भी नहीं रोक पाया था। डॉ. मुकर्जी की स्मृति में जनसेवा में जुटे 13 डॉक्टरों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल जस्टिस वी.एस. कोकजे, महापौर कृष्णमुरारी मोघे और विधायक उषा ठाकुर बतौर अतिथि मौजूद थीं।

मरीजों को डराएं नहीं डॉक्टर

विधायकउषा ठाकुर ने कहा- डॉ. मुकर्जी जब मरीज से बात करना शुरू करते थे, तभी उसकी आधी बीमारी ठीक हो जाती थी। आजकल के डॉक्टर मरीजों को बीमारी के नाम से डरा देते हैं। सम्मानित होने वाले डॉक्टरों की तरह सभी डॉ. मुकर्जी की तरह इलाज करें तो यही सच्ची सेवा होगी। महापौर मोघे ने कहा- इंदौर का नाम मेडिकल के क्षेत्र में सम्मान से लिया जाता है तो इसकी कई वजह है। डॉ. मुकर्जी ने सेवा की जो शुरुआत की थी, आज उसे आधुनिक संसाधनों के साथ ये डॉक्टर आगे बढ़ा रहे हैं।

न्यायमूर्ति कोकजे ने कहा- जिन डॉक्टरों को सम्मान किया वह ज्यादा पैसा कमाने या ज्यादा ऑपरेशन करने के लिए नहीं, बल्कि सेवाभाव रखने काम करने के लिए किया गया। उन्होंने किस्सा सुनाया कि डॉ. मुकर्जी के पास कोई मजदूर पहले पहुंच जाता था तो बिना फीस के भी उसका पूरा इलाज करते थे। कई बार मजदूर को बैठाकर पूरा इलाज समझाते और बाहर सेठ को इंतजार करना पड़ता था।

डॉ. लोकवानी के अलावा शल्य चिकित्सक डॉ. मनीष पोरवाल, डॉ. गिरीश रामटेके, डॉ. के.सी. कोठारी, डॉ. अशोक देसाई, डॉ. संजय जैन, डॉ. राजीव खरे, डॉ. राजेंद्र अग्रवाल, डॉ. प्रमोद शर्मा, डॉ. बसंत डाकवाले, राजकिशोर चौरसिया शामिल हैं। डॉ. सुधीर गवारीकर और डॉ. सुनील एम. जैन की अनुपस्थिति में उनका सम्मान परिजनों ने प्राप्त किया। समाजसेवी अजितसिंह नारंग पुरुषोत्तम