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जीवन के रंग के साथ पेश किए गीत सुहाने

7 वर्ष पहले
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रवीन्द्रनाट्यगृह में मारवाड़ी युवा मंच के प्रोग्राम जीवन के रंग, गीतों के संग पेश किया गया। शीर्षक को सार्थक करते इस प्रोग्राम में सचमुच जीवन के हर रंग के और हर मूड के चुनिंदा गीतों को पेश किया गया। इन गीतों में एक तरफ रोमांस भी था जि़ंदगी का गहरा फलसफा भी था।

विवेक वाघोलीकर ने ज़िंदगी के फलसफे को गाता गीत गाया - ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय। जल्द ही मूड बदलते हुए शिफा अंसारी ने गाया - आओ हूजुर तुमको सितारों में ले चलूं। धवल ने साहिर का लिखा गीत पेश किया तेरे चेहरे से नजर नहीं हटती नजारें हम क्या देखें। विवेक और शिफा जी ने जिंदगी की टूटे लड़ी गीत पेश कर जीवन के अनूठे रंग को पेश किया। राकेश नागर ने नीले नीले अंबर पर तो सुवर्णा ने बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता है गीत गाया।

शनिवार को रवीन्द्र नाट्यगृह में गीत पेश करती शिफा अंंसारी।

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