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होलकरों की ये राजरानियां

7 वर्ष पहले
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होलकरोंराजरानियों में एक कृष्णाबाई थी। उनका दूसरा बेटा यशंवतराव होलकर (प्रथम) विजयी होकर महाराजा बना। 1811 में उनकी मृत्यु हो गई। यशवंतराव होलकर की चार रानियां थी- लाड़ाबाई, तुलसाबाई, कृष्णाबाई तथा मीराबाई। 1807 में यशवंतराव की दिमाग की तकलीफ हो जाने के बाद होलकर दरबार में तुलसीबाई का प्रभाव बढ़ने लगा और वो राजनीति में काफी सक्रिय हो गई थी। 1811 में यशवंतराव की मृत्यु के बाद तुलसीबाई का वर्चस्व स्थापित हो गया। तुलसाबाई बहुत सुन्दर, बुद्धिमान और महत्वाकांक्षी रानी थी। कृष्णाबाई के पुत्र बालक मल्हाराव होलकर को महाराजा घोषित किया गया और तुलसाबाई उसकी संरक्षक बनी। दरबार के सत्ता षड्यंत्रों का पहला शिकार लाड़ाबाई और इमाबाई (मल्हाराव की प|ी) हुई। दोनों ने तुलसाबाई को सत्ता से हटाने के षड्यंत्र किया। यह असफल हो गया और तुलसाबाई ने दोनों की हत्या करवा दी।

तुलसाबाईकी हत्या, अंग्रेजों से हारी होलकर सेना

षड्यंत्रोंके इस माहौल मे मीनाबाई का बढ़ता प्रभाव देखकर तुलसाबाई ने मीनाबाई की भी हत्या करवा दी (1816)। उसके बाद तुलसा बाई के पक्ष और विपक्ष के होलकर दरबार के कुछ और लोगों की भी हत्याएं हुई। इस बीच सरजान मालकम के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज़े 1817 के अंत तक युद्ध का बिगुल बजाती हुई महिदपुर पहुंच गई। अपनी स्थिति को बहुत कमजोर समझते हुए युद्ध के ठीक पहले ही सैनिकों ने तुलसाबाई की हत्या कर दी और होलकर सेना हार गई।

भागीरथीबाईसे वाराणसीबाई तक

आधुनिकइंदौर के निर्माता महाराजा तुकोजीराव द्वितीय की पांच रानियां भागीरथीबाई, रखमाबाई, लक्ष्मीबाई, म्हालसाबाई और राधाबाई थी। भागीरथीबाई का खासगी प्रबंधन में विशेष योगदान रहा। शिवाजीराव होलकर के शासनकाल में धार्मिक-सामाजिक क्षेत्र में महारानी वाराणसीबाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा। रेलवे स्टेशन के पास उनके नाम से मुसाफिरों के ठहरने के लिए एक बड़ी और सुविधाजनक सराय बनाई गई थी। आजकल उसमें जिला पुलिस का मुख्यालय है।

महारानीचंद्रवती होलकर

महाराजतुकोजीराव तृतीय की पहली प|ी चंद्रावती थी। ये रावजी मुंजलाबाई गावड़े (इंदौर) की पुत्री थी। इन्हें युवराज यशवंतराव होलकर तथा पुत्री मनोरमा राजे की मां होने का गौरव प्राप्त हुआ। मनोरमाराजे की मृत्यु 21 वर्ष की अवस्था में हो गई थी। उनकी स्मृति में मनोरमा राजे टी.बी अस्पताल बना हुआ है।

महारानीइंद्रावती