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इधर नतीजे आए और उधर नए नाम चल गए
पूरेप्रदेश से कांग्रेस के लिए वैसी ही खबर आई, जिसकी आशंका पहले से जताई जा रही थी। नतीजे जब आधे-अधूरे आए थे तभी से यह चर्चा चलने लगी कि अब अरुण बाबू का प्रदेश अध्यक्ष बने रहना संभव नहीं रहेगा। जब ऐसी चर्चाएं चल रही हों तो भला इंदौरी कांग्रेसी एक कदम आगे बढ़ें यह कैसे संभव है। इंदौरी ठीयों पर नए कांग्रेस प्रदेश प्रमुख को लेकर नए नए नाम चलाए जाने लगे। बाकी जितने नामों की बातें निकलीं वो अपनी जगह, लेकिन कुछ उत्साहियों ने तो शोभा ओझा का नाम ऐसे बढ़ाया जैसे उन्हें सीधे दिल्ली से संकेत मिल गए हों। जानने-समझने वाले कह रहे हैं कि ओझा यूं भी दिल्ली दरबार में ज्यादा खुश हैं क्योंकि राष्ट्रीय स्तर की नेता मानी जाती हैं, लेकिन उनके नाम से अपनी राजनीति चमकाने वाले दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की गिरती सेहत संभालने के लिए ओझा का मंत्र ही काम आएगा। नाम चलाने वालों को समझाने वाले समझाकर थक चुके हैं कि राष्ट्रीय से राज्य वाला नेता बनना कोई पसंद नहीं करेगा, लेकिन नाम चलाए बिना जिनका काम नहीं चलता वो कहां मानने वाले हैं। {खबरची