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हजारों टैबलेट्स तो ऐसे हैं जो खुले ही नहीं

7 वर्ष पहले
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जनगणनामें उपयोग लाए गए टैबलेट्स विभाग ने फिलहाल जिला पंचायतों में ही रखवा दिए हंै। इंदौर स्थित जिला पंचायत कार्यालय में ऐसे 2400 टैबलेट्स आए थे, जो अब बेकार पड़े हैं।

जनगणना के दौरान इन टैबलेट्स की खराबी सामने आई थी। इंदौर संभाग में भी ऐसा हुआ था। संभाग स्तर पर किसी टैबलेट में खराबी मिलने पर उसे वापस कंपनी भेजने की जिम्मेदारी संबंधित जिला पंचायत कार्यालय के अधिकारियों को दी गई थी। जानकारी के मुताबिक इंदौर संभाग में 400 से ज्यादा टैबलेट खराब होने पर जिला पंचायत कार्यालय तो लाए गए, उस समय यह टैबलेट वारंटी पीरियड में थे और इनकी रिपेयरिंग बिल्कुल फ्री की जानी थी, लेकिन अधिकारियों ने लापरवाही दिखाते हुए इन टैबलेट्स को रिपेयर कराने के लिए भेजा ही नहीं और इन्हें भी अन्य टैबलेट्स के साथ रखवा दिया। इनका आपरेटिंग सिस्टम भी केवल जनगणना के लिए ही था।

^मैं अधिकारियोंसे जानकारी लेता हूं

मैंअधिकारियों से टैबलेट की जानकारी लेता हूं कि उनके इस्तेमाल की क्या योजना है। मैं अभी झारखंड में हूं। दिल्ली पहुंचते ही इस मामले में चर्चा करूंगा।

सुदर्शनभगत, केंद्रीयग्रामीण विकास राज्यमंत्री

^हमारे किसीकाम के नहीं हैं टैबलेट्स

केंद्रसरकार से जो टैबलेट्स हमें भेजे गए थे, वे हमारे किसी काम के नहीं हैं। आर्थिक एवं सामाजिक जनगणना के दौरान ही उनके ऑपरेटिंग सिस्टम में दिक्कतें रही थीं। जनगणना का काम समाप्त होने के बाद हमने उनके दूसरे इस्तेमाल के बारे में भी प्रयास किए, लेकिन उनका ऑपरेटिंग सिस्टम सिर्फ जनगणना के लिए ही तैयार किया गया था। ऐसे में वे हमारे काम में नहीं पाएंगे। हमने इस संबंध में कई बार पंचायत मंत्रालय दिल्ली से मार्गदर्शन मांगा है, लेकिन हमें अभी तक उनका कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

अरुणाशर्मा, अपरमुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीणविकास विभाग, मप्र