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मोटर लगाकर सीधे पानी खींचने से भी घट जाता है प्रेशर
वाटरसप्लाई मैन्युअल के मुताबिक पाइप लाइन सप्लाई के जरिए जनता को 12 मीटर की ऊंचाई (दूसरी मंजिल) तक पर्याप्त प्रेशर से पानी सप्लाई करना अनिवार्य है। इस नियम को फॉलो करने के लिए शहर में बनाई गई 60 से ज्यादा टंकियों की औसत ऊंचाई 20 मीटर तक है बावजूद इसके लिए सप्लाई लाइन में पर्याप्त प्रेशर नहीं रही है।
प्रेशर आने की मुख्य वजह नलों में मोटरें लगाई जाना है। दरअसल नगर निगम एक दिन छोड़कर नर्मदा का पानी सप्लाई करता है, लेकिन लोगों की जरूरत रोज सप्लाई की है। पानी की कमी हो इसके लिए लोग अपने नलों में इलेक्ट्रिक मोटरें लगाकर दो दिन का पानी एक ही दिन में खींचते हैं। इसकी वजह से बगैर मोटरों वाले नलों में पानी का प्रेशर नहीं मिल पाता है। दूसरा कारण टंकियों से सप्लाई लाइन ज्यादा होना भी है। सघन बस्तियों में टंकी की क्षमता से ज्यादा सप्लाई लाइन डाल दी गई है, जिसके सीधा प्रभार प्रेशर पर पड़ रहा है।
^मोटरें लगने से पानी का प्रेशर होता है प्रभावित
सीपीएचओ के वाटर सप्लाई मैन्युअल के मुताबिक हमने पानी की टंकियां डिजाइन की है। टंकियों की औसत ऊंचाई 20 मीटर है जिनसे 12 मीटर की ऊंचाई तक अच्छे प्रेशर से पानी सप्लाई होता है। हमारे पास अब तक प्रेशर को लेकर कोई शिकायत नहीं पहुंची है। अगर कहीं समस्या है तो नलों में मोटर लगने से हो रही होगी। रहवासी हमें इसकी लिखित शिकायत करें तो हम मौके पर जांच करवा लेंगे।
संजीवश्रीवास्तव , अधीक्षणयंत्री नर्मदा प्रोजेक्ट
^प्रेशर से नहीं आते हैं नल
मेरेघर में सात सदस्य हैं जिनके लिए पानी ज्यादा लगता है। हम पानी की जरूरत के लिए नर्मदा पर निर्भर हैं, लेकिन पिछले छह महीने से नर्मदा के कनेक्शन में प्रेशर से पानी नहीं रहा है। वैसे भी पानी एक दिन छोड़कर मिलता है और प्रेशर कम होने से एक दिन की जरूरत भी पूरी नहीं हो पा रही है। मेरे साथ आस पास के कई घरों में प्रेशर की परेशानी है। हमने नगर निगम के अफसरों को कई बार इसकी शिकायत की है, लेकिन कोई हमारी समस्या नहीं समझ रहा है।
गौरवताम्रकार, रहवासीसुदामा नगर