दर्द का सफलता से गहरा नाता है
फ्लाइंगसिख पद्मश्री मिल्खा सिंह सोमवार को शहर में थे। वे एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल में सोमवार से शुरू हुई नेशनल टेनिस टेबल टेनिस टूर्नामेंट की ओपनिंग के लिए आए थे। सिटीभास्कर कीअंकिताजोशी सेविशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि दर्द और सफलता का बहुत गहरा नाता है। करना बस इतना है कि जिसे हम हद समझ रहे हैं उसके पार जाएं। मैंने माता-पिता की गर्दन अपनी आंखों के सामने कटते देखी है। उस दर्द ने मेरे सीने में एक आग लगाई थी। कलेजे की उसी आग ने मुझे आपके सामने पहुंचाया है। पढ़िए मिल्खा का इंदौरमेंदिया पहला साक्षात्कार
दिलज़ोरों से धड़का था, हां मुझे मोहब्बत हो गई थी!
मुझपर बनी फिल्म में जो इश्क की दास्तान कही गई है, वह फिल्म में ग्लैमर जोड़ने के लिए नहीं है। बल्कि सच है। मुझे सच में मोहब्बत हो गई थी। यह 1947 की बात है। जवानी के दिन थे। वो लड़की मेरे घर के सामने रहती थी। मुझसे उससे इश्क़ हो गया। घर के सामने नल पर पानी भरने वह रोज़ आती थी। मैं उसे देखने को खड़ा रहता था। मैं टेनिस बॉल में खत भेजता था और उसी में वो जवाब रखकर भेजती थी।
अचीवरपूरा परिवार होता है
हमारेज़माने की बात कुछ और थी। अब वक्त बिलकुल बदल गया है। दुनिया नई हो गई है। बच्चा जितनी मेहनत कर रहे हैं, उनसे दोगुनी मेहनत मां-बाप करें क्योंकि अचीवर सिर्फ बच्चा नहीं होता। अचीवर पूरा परिवार होता है।
एमरल्ड हाइट्स में देशभर से आए स्पोर्ट्स पार्टिसिपेंट्स को मिल्खा ने सैल्यूट भी दिया। फोटो|विजयभट्ट
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बेहोश हुआ दौड़ते-दौड़ते
मंज़िलयूं ही नहीं मिलती। उसे पाने के लिए मेहनत करना पड़ती है। मैं आठ आठ घंटे दौड़ा हूं। बेहोश हो जाता था दौड़ते दौड़ते। खुद को तपाया है। तब जाकर यहां तक पहुंचा हूं।
अपमान भी ज़रूरी है,
कलेजे की आग जलती रहे
अब्दुलखालिक जिसका क़िस्सा आपने फिल्म में भी देखा होगा। वे 100 मीटर दौड़ते थे। उनके पास इंडिया का कोट था। मेरे कोच साहब ने मुझे उनसे मिलवाया। उन्होंने कहा ऐसे मैंने कई देखे। इसमें क्या खास बात है। मुझे ग़ुस्सा आया। बुरा लगा लेकिन वहीं एक तमाचा जड़ देता तो जंग हार जाता और लोगों के दिलों से उतर जाता। मैंने मैदान में दिखाया मैं कौन हूं।
पिता ने कहा भाग मिल्खा भाग
पाकिस्तान के फैसलाबाद में मेरा जन्म हुआ। बंटवारे के वक्त परिवार को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देखा। मैं भी उनका शिक