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ई-अटेंडेंस मामले की सुनवाई महिला जज से करवाने के लिए शिक्षिकाएं पहुंचीं हाई कोर्ट

7 वर्ष पहले
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इंदौर. शिक्षिकाओं ने इसमें लिखा है कि निजी मोबाइल से सरकारी काम करना निजता का मामला है। इस मसले को कोई महिला जज ही महसूस कर फैसला दे सकती हैं। हालांकि इसके पूर्व जब शिक्षक संभागायुक्त के आदेश के खिलाफ कोर्ट गए थे तो हाई कोर्ट ने इस योजना को निजता में दखल मानने से इनकार कर दिया था।
गुरुवार को महिला शिक्षकों की तरफ से शिक्षक संघ ने यह आवेदन कोर्ट में लगाया है। इधर, राज्य शासन और संभागायुक्त शिक्षकों द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका में जवाब दे चुके हैं। इस जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए शिक्षक संघ ने वक्त मांगा था। शासन ने अपनी योजना को जारी रखने के लिए एनजीओ की रिपोर्ट भी पेश की है। इसमें सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब बताई गई है।
हर स्कूल में शिक्षकों का समय पर नहीं आना और समय से पहले घर चले जाना पाया गया है। हाई कोर्ट ने इंदौर संभाग के लिए संभागायुक्त संजय दुबे द्वारा बनाई गई योजना को यथावत रखा है।

विधायक जीतू पटवारी ने गुरुवार को विधानसभा में ई-अटेंडेंस का मामला उठाया। पूछा कि इंदौर संभाग में शिक्षकों को स्मार्ट फोन खरीदने और नेट कनेक्शन लेने के लिए आदेश जारी किए गए हैं क्या? बड़वानी बुरहानपुर में संभागायुक्त के आदेश के संदर्भ में आदेश जारी हुए।
यदि आदेश जारी नहीं हुए तो क्या कार्रवाई की जाएगी? शिक्षा मंत्री पारस जैन ने कहा प्रदेश में ई-अटेंडेंस सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है। इंदौर संभाग में यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू है।