बिना प्राधिकरण तीन करोड़ फूंके
राज्य खेल प्राधिकरण को क्या भंग कर दिया गया है?
प्राधिकरणको क्यों बंद करेंगे।
लेकिनस्वयं उसके सदस्य बता रहे हैं कि इसकी कोई बैठक या अन्य किसी भी तरह की एक्टिविटी नहीं हो रही है?
मैंपता करता हूं। फिलहाल तो मुझे कोई जानकारी नहीं है।
पिछलेचार साल से खेल प्राधिकरण का कोई काम नहीं हुआ तो भी उसे अनुदान मिल रहा है। क्रीड़ा परिषद, जो कि भंग हो गई है, उसे भी अनुदान दिया जा रहा है?
यहसब मेरे पहले के मामले हैं। देखकर ही बता पाऊंगा।
इंदौर/भोपाल
खेलव्यवस्था को दुरुस्त करने और खिलाड़ियों सरकार में समन्वय बनाने के लिए शुरू किया जाने वाला खेल प्राधिकरण कागजों में ही संचालित होकर खत्म हो गया। इसके गठन को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा था तो गत वर्ष कुछ लोगों को सदस्य बनाया गया, लेकिन उन्हें किसी भी बैठक में बुलाया ही नहीं गया। जब सरकार की किरकिरी होने लगी तो कागजों में शुरू किया गया प्राधिकरण कागजों में ही बंद कर दिया, लेकिन सवाल यह है कि इस दौरान जो तीन करोड़ रुपए अनुदान बांटा गया, वो कहां खर्च हुआ? दूसरा बड़ा सवाल यह है कि जिस क्रीड़ा परिषद को भंग करने की सूचना स्वयं डायरेक्टाेरेट स्पोर्ट्स की वेबसाइट पर दी गई है तो फिर परिषद के नाम पर इतने सालों से बजट किसे दिया गया हैै? इस बारे में बात करने पर जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।
खिलाड़ियोंको फायदा होता
क्रीड़ापरिषद भंग होने के बाद खेल प्राधिकरण को लेकर कभी किसी भी स्तर पर मुझसे चर्चा नहीं की गई। यदि प्राधिकरण अस्तित्व में आता तो प्रदेश के खिलाड़ियों काे फायदा होता।
ओमयादव, पूर्वउपाध्यक्ष, क्रीड़ा परिषद (अब यह भंग हो गया है)