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निजी कॉलोनियों में आय के आधार पर मिलेंगे गरीबों को मकान

7 वर्ष पहले
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कमजोरआय वर्ग के लोगों को निजी कॉलोनियों में मकान आवंटित करने के लिए दो साल से अटकी प्रक्रिया फिर शुरू हो रही है। शासन ने इस संबंध में जिला प्रशासन को मार्गदर्शन देते हुए कहा है कि निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और एलआईजी (निम्न आय वर्ग) के लिए रखे गए मकान जातिगत आरक्षण की बजाय आय के आधार पर ही गाइडलाइन भाव से बेचे जाएं। शासन के मार्गदर्शन के बाद ट्रेजर टाउन, ओमेक्स ग्रुप मनुश्री कॉलोनियों में इन वर्ग के लिए रखे गए 550 मकानों को बेचे जाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश कलेक्टर ने दे दिए हैं।

साल 2012 में शासन ने निजी कॉलोनाइजरों के लिए बने नगर निगम के नियम दस के आधार पर प्रावधान किया था कि कॉलोनाजर विज्ञापन जारी कर आवेदन बुलाएगा और कलेक्टर को आवेदनकर्ताओं की सूची देगा। प्रशासन इनका सत्यापन कर पात्र लोगों को आरक्षित मकानों की बिक्री की मंजूरी देगा। जिला प्रशासन ने इस बात को लेकर प्रक्रिया रोक दी थी कि आरक्षण आय के आधार पर किया जाए या इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा अनूसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के आधार पर। कलेक्टर ने पत्र लिखकर शासन से मार्गदर्शन मांगा था, जिस पर अब शासन का यह मार्गदर्शन गया है।

शहर में बिक सकेंगे डेढ़ हजार मकान

^शासनसे इस संबंध में मार्गदर्शन गया है। अब इस साल करीब डेढ़ हजार मकान ईडब्ल्यूएस निम्न आय वालों को बेचे जा सकेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। -आकाश त्रिपाठी, कलेक्टर

इस तरह मिलेंगे मकान

> निजी कॉलोनाइजर कुल बनाए गए मकानों का 15 फीसदी इन वर्गों के लिए रखेगा। इसमें 60 फीसदी ईडब्ल्यूएस के लिए और 40 फीसदी एलआईजी के लिए होंगे।

> ईडब्ल्यूएस के लिए वे लोग पात्र होंगे जिनकी सालाना आय 1 लाख रुपए तक है, जबकि एलआईजी के लिए1 से 2 लाख रुपए सालाना आय होनी चाहिए।

> निजी कॉलोनाइजर सार्वजनिक सूचना देकर पात्र लोगों के आ‌‌‌वेदन बुलाएंगे। कलेक्टर को यह सूची दी जाएगी। कलेक्टर 60 दिनों के भीतर इनकी जांच कराएंगे।

> यदि पात्र लोगों के आ‌‌‌वेदन कुल मकानों से ज्यादा आते हैं, तो कलेक्टर द्वारा नियुक्त अधिकारी की उपस्थित में लॉटरी सिस्टम से चयन होगा।

> इन लोगों को गाइडलाइन के हिसाब से ही मकान बेचे जाएंगे।