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चिंता से चिंतन की यात्रा का नाम ही भागवत है : ठाकुरजी

7 वर्ष पहले
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इंदौर| भागवतमें सभी संशय और समस्याओं का निदान है। भागवत श्रवण कलियुग में अमृत है। यदि परमात्मा ने किसी भी युग में जिस गर्भ से जन्म लिया है तो वह गर्भ भी परमात्मा के साथ-साथ दिव्य हो जाती है। चिंतन जिसका भी पक्का होता है वह कहीं भी रहे, वह अपने संस्कार और संस्कृति कभी नहीं भूलता। उसी प्रकार हमें अपने कार्य की चिंता को छोड़कर चिंतन करना चाहिए। उसकी प्रकार चिंता से चिंतन की यात्रा का नाम ही भागवत है।

यह बात कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुरजी ने परदेशीपुरा स्थित मां कनकेश्वरी धाम सुगनीदेवी कॉलेज में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन वामन अवतार और प्रहलाद चरित्र के प्रसंग पर सोमवार को कही। कथा में मंगलवार को दोपहर 2 से 6 बजे तक होगी।

नगर निगम रोड पर खंडारे परिवार द्वारा भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग मनाया गया। इस दौरान भजन भी हुए।