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छात्रों ने उठाए सवाल- होलकर कॉलेज के पास बॉटनीकल गार्डन क्यों नहीं है
एकतरफ होलकर साइंस कॉलेज नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल) के दौरे की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ बड़ी खामियां उसके लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। लगातार खराब रिजल्ट पर सवाल उठने के बाद अब बॉटनी के छात्रों ने बॉटनीकल गार्डन नहीं होने से प्रेक्टिकल में रही परेशानी का मुद्दा उठाया है। छात्रों ने प्रबंधन से पूछा है कि छह साल पहले बीआरटीएस में टूट चुके बॉटनीकल गार्डन को दोबारा क्यों नहीं बनवाया जा रहा है। इतना ही नहीं कॉलेज को इसी साल होने वाले नैक की टीम के निरीक्षण में भी बॉटनीकल गार्डन पर जवाब देना होगा।
34 एकड़ जमीन पर विकसित इस कॉलेज में बॉटनी के 500 से ज्यादा छात्र हैं। डेढ़ दर्जन से ज्यादा स्टाफ है। यूजीसी का भी नियम है कि बॉटनी विषय शुरू करने या जारी रखने के लिए बॉटनीकल गार्डन होना जरूरी है। उसमें कोर्स की संख्या और छात्रों की जरूरत के हिसाब से पौधे भी होना चाहिए, लेकिन होलकर कॉलेज के छात्रों को फिलहाल सिर्फ थ्योरी के भरोसे कोर्स पूरा करना पड़ रहा है।
^सामान्य तौर पर साइंस के हर विषय के साथ प्रेक्टिकल लैब होती है, लेकिन बॉटनी में कई ब्रांच ऐसी होती हैं, जिनके लिए बॉटनीकल गार्डन ही प्रेक्टिकल लैब की तरह होती हैं। गार्डन में मेडिसिन प्लांट से ही छात्र उनका महत्व और उनसे जुड़ी तमाम बातों को समझ सकते हैं। यूजीसी की गाइड लाइन में भी बॉटनीकल गार्डन को जरूरी बताया गया है।\\\'\\\' -डॉ.अवनीश पांडेय, सीनियरप्रोफेसर बॉटनी
गार्डन होगा तो ही समझेंगे मेडिसिन प्लांट
गार्डन है, उसे जल्द तैयार करेंगे
^हमारे पास बॉटनीकल गार्डन है। उसे जल्द तैयार करेंगे। पहले काफी बड़ा गार्डन था, लेकिन वह बीआरटीएस के कारण टूट चुका है। प्रयास जारी है कि वैसा ही बड़ा गार्डन फिर तैयार हो।\\\'\\\' -डॉ.संजय व्यास, सीनियरप्रोफेसर बॉटनी विभाग
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के पास भी बॉटनीकल गार्डन नहीं है। आईआईपीएस परिसर के समीप स्थित उसका सालों पुराना बॉटनीकल गार्डन पूरी तरह उजड़ चुका है। पहले हर साल 50 हजार रुपए बजट इसके लिए दिया जाता था, लेकिन अब उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। यूनिवर्सिटी ने पिछले पांच साल में कई बार गार्डन विकसित करने का दावा किया, लेकिन उसे पूरा नहीं किया।
यूनिवर्सिटी का भी यही हाल, जमीन ही रह गई