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राजेंद्र नगर ऑडिटोरियम : अब सांसद, मंत्री लेंगे निर्णय, मुख्य समस्या रुपए की

7 वर्ष पहले
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राजेंद्रनगर में 22 करोड़ की जमीन और सात करोड़ की लागत से बने ऑडिटोरियम के बचे हुए विकास का मामला अब और उलझ गया है। पिछले दिनों जिला योजना समिति की बैठक में जहां यह प्रस्ताव गया कि इसे संस्कृति विभाग नहीं, हम खुद ही विकसित करें। इधर, संस्कृति विभाग ने आईडीए से इंटीरियर सहित अन्य कार्यों के लिए 50 प्रतिशत राशि सवा चार करोड़ रुपए मांग लिए हैं।

दरअसल, संस्कृति विभाग में हाल ही में प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव बने हैं। उन्होंने इस मामले में रुचि ली और इसकी डीपीआर बनवाई। कुल साढ़े आठ करोड़ में सभी काम होने की योजना बनी। विभाग ने आईडीए को पत्र लिखकर 50 प्रतिशत राशि मांगी है। विभाग का कहना है बाकी राशि हम जुटा लेंगे। इस पर आईडीए बोर्ड के मेंबर को आपत्ति है। बोर्ड सदस्यों का तर्क है कि 22 करोड़ की जमीन पर सात करोड़़ रुपए पहले ही आईडीए लगा चुका है। अब और चार करोड़ दें और हमारे पास उसका किसी तरह का अधिकार हो। ऐसे में राशि खर्च करने से क्या मतलब? आईडीए चेयरमैन शंकर लालवानी प्रदेश के संस्कृति मंत्री सुरेंद्र पटवा से चर्चा कर चुके हैं। मंत्री की मंशा है विभाग ही इसे विकसित करे, लेकिन विभाग के पास राशि की कमी है।

1500 सीट का सबसे बड़ा ऑडिटोरियम

आईडीएने इसे सबसे बड़े (1500 सीट) ऑडिटोरियम के रूप में विकसित किया। शहर में अभी 1200 सीट के ही ऑडिटोरियम हैं। इसके बावजूद डेढ़ साल से यहां विभाग का गार्ड तैनात है और मुख्य द्वार पर ताला डला है। आसपास जंगली घास उग आई है।

सांसद की रुचि अकादमी बनाने में

लोकसभाअध्यक्ष और शहर की सांसद सुमित्रा महाजन से चेयरमैन की जो चर्चा हुई, उसमें वे भोपाल की तर्ज पर यहां भी एक अकादमी बनाना चाहती हैं, जो कला, साहित्य या सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र हो। अब तक इस तरह की अकादमियों का केंद्र भोपाल बना हुआ है, जहां भारत भवन, साहित्य कला अकादमी जैसे अन्य संस्थान हैं। पूरे मामले में चेयरमैन लालवानी का कहना है महाजन, मंत्री सुरेंद्र पटवा के साथ बोर्ड सदस्यों को बैठाकर निर्णय लेंगे। इसी माह इस संबंध में निर्णय लेंगे।