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छात्रवृत्ति की गड़बड़ियों से अब भी नहीं लिया सबक

7 वर्ष पहले
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प्रदेशसरकार के दो विभागों में स्कॉलरशिप और शैक्षणिक शुल्क बांटने के नियम अलग-होने से पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति लेने वाले स्टूडेंट परेशान हैं। राजधानी के कई कॉलेजों में इन छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है। पड़ताल में सामने आया कि पिछड़ा वर्ग विभाग के नियमानुसार शैक्षणिक शुल्क संस्था के खाते में जाता है, जबकि अजा, अजजा विभाग में छात्रवृत्ति और शैक्षणिक शुल्क छात्रों के खातें में पहुंचता है। इसके चलते छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है, जबकि जिला पिछड़ा वर्ग कार्यालय के अधिकारी संस्थाओं के खाते में पैसा जाने की बात कह रहे हैं।

नहींली सीख

पिछलेसाल कुछ कॉलेजों द्वारा फर्जी छात्र बनाकर स्कॉलरशिप ली गई थी। इस खुलासे के बाद भी पिछड़ा वर्ग विभाग के जिम्मेदार सीख नहीं ले रहे। अब भी विभाग राशि सीधे संस्थाओं के खाते में डाल रहा है, जबकि दूसरी तरफ अनुसूचित जाति और जनजाति विभाग द्वारा हितग्राही के खाते में सीधे पैसा डालने का नियम है। यहां पर एक सरकार के दो विभागों में अलग-अलग नियम के कारण पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछड़ा वर्ग विभाग में गलत प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

छात्रों के अकाउंट नहीं मिले

हमेंजिन छात्रों के अकाउंट नहीं मिले, उनकी छात्रवृत्ति भी संस्था के खाते में जमा हुई है। नहीं बंट रही तो मैं दिखाता हूं।

रईसखान, सहायकसंचालक, पिछड़ा वर्ग कार्यालय, भोपाल

मैंदिखवा लेता हूं

राशिबच्चों के खाते में जाना चाहिए। मुझे अभी इसकी जानकारी नहीं है। मैं इसको दिखवा लेता हूं।

अंतरसिंहआर्य, मंत्री,पिछड़ा वर्ग एवं कल्याण विभाग, मप्र

गड़बड़ीरोकने के लिए

विभागद्वारा हितग्राहियों के खाते में सीधे पैसा डाला जा रहा है। इससे बीच में संस्थाओं द्वारा की जाने वाली गड़बड़ी को रोका जा सकेगा। इसमें हमें सफलता भी मिली है।

ज्ञानसिंह, मंत्री, आदिमजाति एवं अनुसूचित जाति विभाग, मप्र

धांधली रोकने का बनाया नियम

पिछलेसाल लोकायुक्त कार्रवाई में कई ऐसे कॉलेजों का खुलासा हुआ था, जहां फर्जी छात्रों के एडमिशन पर कॉलेज स्कॉलरशिप निकाल रहे थे। जालसाजी में करोड़ों रुपए निकाल लिए गए। इस कारण अजा और अजजा विभाग के अधिकारियों ने सीधे छात्रों के खाते में स्कॉलरशिप और शैक्षणिक शुल्क डालने का नियम बनाने पर जोर दिया, ताकि बीच में कोई संस्था या व्यक्ति उसके हक को मार सके। बावजूद