पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पहले संतूर बनाया, फिर सीखा

पहले संतूर बनाया, फिर सीखा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मैंनेजब पहली बार पंडित शिवकुमार शर्मा का संतूर वादन सुना तो मंत्रमुग्ध रह गया। संतूर का साउंड और उसकी टोनल क्वालिटी से मैं खासा प्रभावित हुआ। तब मैं तबला बजाता था। दस साल तक तबला बजाया लेकिन मेरे मन में संतूर बनाने की गहरी इच्छा पैदा हुई। मैंने पहले संतूर बनाया और उसे एक प्रोग्राम के इंटरवल में पंडित शर्मा को दिखाया। मैंने कहा मैं संतूर सिखना चाहता हूं। मैं सौभाग्यशाली हूं कि पंडितजी से 1981 से लेकर आज तक संतूर सीख रहा हूं। यह कहना है संतूरवादक डॉ. धनंजय दैठणकर का। वे स्पिक मैके के विरासत-2014 के तहत मंगलवार को ईएमआरसी में सुबह 12 बजे अपना वादन पेश करेंगे।

उन्होंनेकहा संतूर को चुनो

सिटीभास्कर से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि जब मैंने पंडितजी को संतूर दिखाया तो उन्होंने उनके संगतकार पंडित रतनलाल टिक्कू से कहा कि इन्हें सिखाइए। वे मेरे पहले गुरु हैं।

पुणे में जब जब पंडित शर्मा आते तो पूछते थे कि क्या सिखा। संतूर बजाकर दिखाओ। एक दिन उनका मैसेजे आया कि मुंबई जाओ मैं तुम्हें संतूर सिखाऊंगा। यह मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सरप्राइज था। मैं आज भी उनसे सीख रहा हूं। मैंने उन्हीं के कहने पर आयुर्वेदिक की प्रैक्टिस छोड़कर संतूर को चुना था।

डॉ. धनंजय दैठणकर

one-to-one