29 गांवों के मामले में अचानक टली सुनवाई
सोमवारको शासन, जिला प्रशासन और नगर निगम के लिए अहम था। शहरी सीमा बढ़ाए जाने के मसले पर दायर दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई होना थी। शासन का पक्ष रखने महाधिवक्ता खुद जबलपुर से इंदौर आए थे। प्रशासनिक अधिकारी, निगमायुक्त भी सुनवाई से काफी समय पहले हाई कोर्ट पहुंच गए थे। याचिकाकर्ता भी दस्तावेजों से भरे झोले लेकर कोर्ट रूम के बाहर इंतजार में थे। दोपहर करीब सवा बजे अचानक खबर आई कि डिविजन बेंच इस मामले की सुनवाई नहीं कर रही है। बेंच के एक जज अपरिहार्य कारणों के चलते चले गए। इस पर याचिकाकर्ता किशोर कोडवानी, एडवोकेट अनिल त्रिवेदी डिविजन बेंच के दूसरे जस्टिस की कोर्ट में चले गए और अगली सुनवाई की तारीख जल्दी देने की गुहार लगाई। इस पर कोर्ट ने अब 24 सितंबर को सुनवाई की तारीख तय की है।
जस्टिस पीके जायसवाल, जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की डिविजन बेंच 29 गांव शामिल करने की प्रक्रिया के खिलाफ और 29 के बजाए पूरे 90 गांव शामिल करने को लेकर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में कोडवानी ने कोर्ट से आग्रह किया था कि नगर निगम चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले इस मामले की सुनवाई कर ली जाए। निर्वाचन प्रक्रिया शुरू होने के बाद इन याचिकाओं का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने सोमवार को दोपहर ढाई बजे सुनवाई करना तय किया था। निगमायुक्त राकेश सिंह, सचिव अभय राजनगांवकर, प्रशासनिक अधिकारी दोपहर साढ़े 12 बजे ही हाई कोर्ट पहुंच गए थे। सवा बजे पता चला कि सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारी भी दस्तावेज समेटकर चले गए।
शामतक कोर्ट में ही रहे
दोनोंयाचिकाकर्ता कोर्ट का समय समाप्त होने तक कोर्ट परिसर में ही रहे। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव के यहां उन्होंने अगली तारीख के लिए आग्रह किया था। कोर्ट का समय समाप्त होने के बाद इस मसले पर बात करना तय हुआ। इस पर 24 सितंबर की तारीख तय हुई।