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पितृपक्ष में 19 से 21 तक खरीदारी के श्रेष्ठ योग
पुष्य नक्षत्रों का राजा है। इसमें किए गए सभी कार्य स्थिर होते हैं। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। पंडितों के अनुसार फलित ग्रंथों में शनि को इस नक्षत्र का स्वामी माना गया है। गुरु शुभत्व का कारक है और शनि स्थिरता का। इस साल संयोग से शनि भी उच्च राशि तुला में है और गुरु भी अपनी उच्च राशि कर्क में। इस तरह पितृ पक्ष में रहे पुष्य नक्षत्र में खरीदी से पितरों का आशीर्वाद भी मिलेगा।
सर्वार्थसिद्धियोग : नवरात्रिमें तीन दिन रहे सर्वार्थसिद्धि योग भी श्रेष्ठ है। यह सभी कार्य को सिद्ध करने वाला है।
पुष्य का स्वामी शनि, संयोग से शनि-गुरु दोनों उच्च राशि में
दो दिन अमावस्या
पितृपक्षमें इस बार अमावस्या दो दिन रहेगी। पंडितों के अनुसार 23 सितंबर को सुबह 9.44 बजे तक चतुर्दशी तिथि है। इसके बाद अमावस्या शुरू होगी, जो 24 सितंबर की सुबह तक रहेगी। पितृ तर्पण, श्राद्ध 23 को होगा। 24 को स्नान-दान और देवकार्य के लिए अमावस्या रहेगी।