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दूसरों का हाथ थामने की कहानी एलिझाबेथ एकादशी

7 वर्ष पहले
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सिटीभास्कर से खास बातचीत करते हुए वे कहते हैं कि इसका नाम एलिझाबेथ एकादशी क्यों रखा है, इसे मैं दर्शकों के लिए सस्पेंस रखना चाहता हूं। फिल्म की शुरुआत के पांच मिनट में ही दर्शक जान जाएंगे कि यह नाम मैंने क्यों रखा। मैंने एक्टर के रूप में करियर की शुरुआत की थी, लेकिन जब अपने ही लिखे एक नाटक का निर्देशन किया तो मुझे लगा कि मैं निर्देशक के रूप में अपने को ज्यादा बेहतर ढंग से अभिव्यक्त कर सकता हूं। तब 1999 में मैंने फैसला लिया कि मैं नाटक हो या फिल्म सिर्फ निर्देशन करूंगा। हरिश्चंद्र फैक्ट्री के बाद यह एलिझाबेथ एकादशी मेरी दूसरी फीचर फिल्म है। उल्लेखनीय है कि उनकी पहली फीचर फिल्म दादा साहब फाल्के पर हरिश्चंद्र फैक्ट्री थी जिसे ऑस्कर अवॉर्ड के लिए बेस्ट फॉरेन फिल्म कैटेगरी में भेजा गया था।

परेश मोकाशी

देखी गई हर फिल्म ने मुझे सिखाया

मैंने अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र की फिल्में भी देखी हैं और वर्ल्ड सिनेमा भी देखा है। हर फिल्म से मैंने कुछ सिखा ही है। कुछ फिल्मों ने सिखाया कि फिल्में इस तरह से अच्छी बनाई जा सकती हैं और कुछ फिल्मों ने सिखाया कि फिल्में ऐसी कतई नहीं बनाई जाना चाहिए। मैंने दुनिया का बेहतरीन सिनेमा देखा है। खासतौर पर सर्गेई रशियन मास्टर्स आइजेंस्ताईन, तारकोव्यस्की, चेक फिल्ममेकर जिरी मेंजिल, फ्रेट्ज लान्ग और जोसेफ मरनऊ की फिल्में बेहद पसंद हैं।

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