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काउंसलिंग कमेटी पर भी उठे सवाल, एसआईटी करेगी सदस्यों से पूछताछ

7 वर्ष पहले
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फोटो मिलान के दौरान क्यों नहीं पकड़ पाए गड़बड़ी

दीपेशशर्मा | इंदौर

पीएमटी-2009के फर्जीवाड़े में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) भी सवालों के घेरे में गया है। एसआईटी (विशेष जांच टीम) अब इस बात की जांच कर रही है कि डीएमई की काउंसलिंग कमेटी ने काउंसलिंग के दौरान फोटो मिलान क्यों नहीं की? यदि मिलान की तो गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ में आई? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि परीक्षा में फर्जी छात्र बैठे थे, परीक्षा फार्म पर भी उन्हीं के फोटो थे, जबकि काउंसलिंग में असली छात्र शामिल हुए। एसआईटी अब इस मामले में कमेटी में शामिल रहे अधिकािरयों से भी पूछताछ करेगी।

इंदौर एसआईटी प्रभारी एएसपी देवेंद्र पाटीदार और सीएसपी अजय जैन ने 2009 पीएमटी में हुए फर्जीवाड़े में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की। छात्रों को स्कोरर उपलब्ध करवाने वालों में सबसे बड़ा गिरोह गोरखपुर के आरोपी विंध्यवासिनी का होना पता चला है। इसके अलावा अन्य गिरोह उनके सरगनाओं से पूछताछ में सामने आया कि छात्र से रकम तय हो जाने के बाद परीक्षा फॉर्म में स्कोरर का फोटो लगाया जाता था। यह फोटो एडमिट कार्ड के अलावा व्यापमं द्वारा परीक्षा सेंटर पर भेजी सूची में भी रहता है। शेष-पेज 6 पर



सिलेक्शनहोने के बाद व्यापमं की रिजल्ट सूची में भी स्कोरर का ही फोटो जाता है। यह सूची डीएमई की काउंसलिंग कमेटी को भेजी जाती। काउंसलिंग में कभी स्कोरर नहीं जाता। वहां असली छात्र ही जाता है और फिर उसे कॉलेज अलॉट किया जाता है।

लापरवाही या मिलीभगत?

आरोपियों के खुलासे के बाद एसआईटी के अधिकारियों ने एसटीएफ से बात की, फिर डीएमई ऑफिस से जानकारी ली गई। वहां के अधिकारियों ने पुलिस को बताया फोटो का मिलान सही होता था, हो सकता है स्कोरर ही काउंसलिंग में आया हो। यह जवाब इसलिए सही नहीं लग रहा, क्योंकि किसी भी गिरोह ने स्कोरर को काउंसलिंग में भेजे जाने का खुलासा नहीं किया। पुलिस अब काउंसलिंग कमेटी में शामिल होने वाले तत्कालीन अधिकारियों की जानकारी निकाल रही है।



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लापरवाही हो सकती है

^परीक्षाके बाद व्यापमं रिजल्ट की सूची डीएमई को भेजता था। काउंसलिंग के समय फोटो मिलान कर लिए जाते तो गड़बड़ी पकड़ी जाती। लापरवाही कई स्तर पर हुई है। जांच कर रहे हैं। -देवेंद्रप