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फ्रेंड्स भी ब्रो और डूड बुलाते हैं मुझे

7 वर्ष पहले
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टेक्नोलॉजी ने भी बढ़ाई जनरेशन गैप

हमअपनी फैमिली के तीन साल के बच्चों को ही देखें। वे बड़े आराम से आईपैड ऑपरेट कर लेते हैं। एप्स डाउनलोड कर लेते हैं, सेल्फीज़ ले लेते हैं। एक घर में तीन बच्चे हैं लेकिन तीनों अपने वर्चुअल वर्ल्ड में हैं। पैरेंट्स के लिए टाइम नहीं है। हालांकि जनरेशन गैप तो हमेशा से है यह फर्क रहेगा भी, लेकिन टेक्नोलॉजी ने इस गैप को और बढ़ाया है। मैं अपने हमउम्र युवाओं को यही सजेस्ट करूंगी कि थोड़ा टाइम पैरेंट्स को भी दें। यह बहुत ज़रूरी है।

ग्रैंडपैरेंट्स सिखाते हैं जीने का सलीका

आमतौरपर हमने देखा है कि बच्चे ग्रैंड पैरेंट्स के ज्यादा करीब होते हैं। पैरेंट्स अर्निंग वगैरह में बिज़ी होते हैं इसलिए ज्यादा वक्त नहीं दे पाते। कुछ चीज़ें हैं जो दकियानूसी हैं और अब बच्चे वैसा ही करें यह पॉसिबल नहीं है। जैसे पार्टीज़ और क्लबिंग। आजकल ये बहुत नॉर्मल है, लेकिन बड़ों की कई बातें सही और लाइफसेविंग होती हैं जैसे लेट नाइट रिवीलिंग कपड़े पहनक आएंगे तो लोग आपको जज करने लगेंगे और इस तरह आप खुद अपनी सेफ्टी में कोताही बरतेंगे। लोगों से ओवरफ्रेंडली होना भी ठीक नहीं है। खासतौर पर लड़कियों के लिए।

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