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एक्सपेरिमेंट और क्रिएटिविटी की प्रभावी सोबत-संगत

7 वर्ष पहले
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शनिवार को यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में सानंद न्यास के तहत सोबत संगत नाटक का प्रभावी मंचन किया गया।

आज तीन प्रयोग

नाटकसोबत संगत की यूसीसी ऑडिटोरियम में आज तीन प्रस्तुतियां दी जाएगी। सुबह 10 बजे मामा मुजुमदार, अपरान्ह 4 बजे बसंत समूह और सायं 7:30 बजे बहार समूह के लिए होगा।

निर्देशन

चारकहानियों को आपस में इस प्रकार से प्रस्तुत करना कि प्रत्येक का व्यक्तित्व उभरकर सामने आए इसके लिए कल्पनाशील निर्देशन जरूरी था। संपदा जोगळेकर कुलकर्णी ने यही किया।

अभिनय

अविनाशनारकर, ऐश्वर्या नारकर और संपदा जोगळेकर ने चारों कहानियों के रंग और स्वभाव के अनुरूप अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया। संवाद अदायगी शानदार थी।

Drama Review

अनुराग तागड़े :इंदौर

सृजनात्मकता,नवीनता, ताजगी और जोखिम मोल लेने की प्रवृत्ति के साथ आती है। सानंद के मंच पर नाटक संगत सोबत में प्रयोगधर्मिता का तालमेल मनोरंजन के साथ बेहतरीन तरीके से बैठाया गया है। उसमें शानदार स्क्रिप्ट, संगीत, संवाद और प्रकाश व्यवस्था ने इसे प्रभावी बना दिया। यह मनोरंजन के दायरे में रहते हुए सामाजिक बदलावों के बारे में सोचने पर मजबूर करता है।

कहानी

नाटकमें चार कहानियां है जिनमें पहली कहानी फेसबुक पर भावनात्मक साथी समझ किस तरह से एक लड़का और लड़की मिलते हैं और जब उन्हें यह पता चलता है कि दोनों की पसंद अलग है तब वे केवल दोस्त बन जाते है। दूसरी कहानी गांव की दो लड़कियों की है कि किस तरह से वे अपनी गायन प्रतिभा के दम पर मुंबई पहुंचती हैं और वापस आने पर उनके ही गांव में उनका कैसा विरोध होता हैं। तीसरी कहानी बुजुर्ग दंपती की है कि किस तरह अपनी लड़की से अलग होकर दोनों टेलीविजन में अपने परिवार का सुख देखते है। अंतिम कहानी में सोबत संगत के बारे में सुरीला चित्रण किया गया हैं।