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निजी अस्पतालों में भी डेंगू के 50 संदिग्ध मरीज

7 वर्ष पहले
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डेंगूके सप्ताहभर में तीन मामले सामने आने के बाद भी बेफिक्र रहा स्वास्थ्य विभाग एक मरीज की मौत के बाद सक्रिय हुआ। मंगलवार को कलेक्टर आकाश त्रिपाठी की मौजूदगी में विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें तय किया कि जिले में जागरूकता अभियान चलाने के साथ अस्पतालों में भी डेंगू के संदिग्ध मरीजों के इलाज पर खास ध्यान दिया जाए। हालांकि सरकारी अस्पतालों में डेंगू के 18 में से 17 मरीज ठीक होने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई लेकिन निजी अस्पतालों में 50 से ज्यादा संदिग्ध मरीज मिलने से विभाग की चिंता बढ़ गई। 2009 में डेंगू ने पैर पसारे थे, तब भी विभाग ने निजी अस्पतालों पर ध्यान नहीं दिया था और इसने महामारी का रूप ले लिया था। लेकिन प्रशासन अब उसे दोहराना नहीं चाहता। इसलिए निजी अस्पतालों पर भी उसकी निगाह है।

तेजी से कर रहे हैं प्रयास

^डेंगूपर नियंत्रण के लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं। एक मरीज की मौत के बाद हर संदिग्ध पर निगरानी रखी जा रही है। जिन मरीजों में डेंगू पाया गया है उनका गंभीरता से इलाज किया जा रहा है। -डॉ.शरद पंडित, संयुक्तसंचालक, स्वास्थ्य

बोर्ड और टीवी चैनलों के जरिये होगा प्रचार-प्रसार

बैठकमें तय किया गया कि डेंगू रोकने तथा लोगों को जागरूक करने के लिए होर्डिंग्स, बोर्ड लगाकर, एफएम और टीवी चैनलों के जरिये अभियान चलाया जाएगा। जल जमाव वाले क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाया जाएगा। बैठक में डॉ. आर.एस. सोढ़ी, एमवायएच अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर, सिविल सर्जन डॉ. सतीश त्रिवेदी, आशुतोष शर्मा सहित अन्य अधिकारी डॉक्टर्स मौजूद थे।