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आरटीओ में फर्जी तरीके से बने हैवी लाइसेंस

7 वर्ष पहले
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इंदौर. विजय नगर आरटीओ कार्यालय में बुधवार को ड्राइविंग लाइसेंस का फर्जीवाड़ा सामने आया। बिना पूर्व लाइसेंस के चार लोगों का फर्जी तरीके से सीधे हैवी व्हीकल्स का लाइसेंस जारी कर दिया। इसमें एजेंट, स्मार्ट चिप कंपनी के कर्मचारियों के साथ बाबुओं की मिलीभगत सामने आई है।
इसके बाद कंपनी के एक कर्मचारी को निकाल दिया है। वहीं लाइसेंस बनवाने वाले चारों लोगों के लाइसेंस को निरस्त करते हुए उन्हें नोटिस भी जारी किया है। आरटीओ ने तीन माह में बने हैवी लाइसेंस की जांच के आदेश दिए हैं।

आरटीओ एमपी सिंह ने बताया उन्होंने एआरटीओ अर्चना मिश्रा को हैवी लाइसेंस पर नजर रखने के निर्देश दिए थे। मिश्रा ने मंगलवार को ऐसे चार लाइसेंस संदेह होने पर रोके। हैवी लाइसेंस के लिए पहले दो और चार पहिया वाहन का कम से कम एक साल पुराना लाइसेंस होना जरूरी होता है।
हैवी लाइसेंस में जो लाइसेंस कार्ड लगाए गए थे वे कुछ दिन पहले ही डुप्लीकेट या रिन्यू के नाम पर निकाले गए थे। ये विभाग के रिकार्ड में ये थे ही नहीं। लाइसेंस मांगीलाल निवासी जामली महू, सोहेब निवासी विनोबा नगर, बलराम ग्रेवाल निवासी कंुडकूंद महू और तेजसिंह चौहान निवासी शिवनी इंदौर के नाम पर बने।

कंपनी कर्मचारी और एजेंट की मिलीभगत

प्राथमिकजांच में सामने आया है कि स्मार्ट चिप कंपनी के ऑपरेटर विक्रम ने ये लाइसेंस जारी किए थे। आवेदकों के पुराने रिकॉर्ड को वेरिफाई करने की जिम्मेदारी उसकी थी लेकिन उसने प्रक्रिया का पालन नहीं किया। आरटीओ के निर्देश पर कंपनी ने उसे तुरंत निकाल दिया है। नोटिस देते हुए स्पष्टीकरण भी मांगा है। आरटीओ ने बताया गड़बड़ी में जिस भी एजेंट का नाम सामने आता है उसके खिलाफ एफआईआर करवाएंगे।

बाबुओं की भूमिका भी संदिग्ध

मामलेमें लाइसेंस शाखा के बाबुओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि लाइसेंस बिना बाबू के अथोराइजेशन कार्ड के जारी नहीं हो सकते। कार्ड जारी करने से पहले बाबू को सभी रिकॉर्ड चेक करना जरूरी होता है यहां ऐसा किया जाता तो लाइसेंस बनते ही नहीं और गड़बड़ी पहले ही सामने जाती।
आरटीओ ने बताया फाइलों में किए गए दस्तखत से बाबुओं की हैंडराइटिंग का मिलान करवाया है। किसी भी बाबू की हैंडराइटिंग नहीं मिली है। आशंका है कि ये फाइलें एजेंटों ने ही फर्जी साइन कर ऑपरेटर से मिलकर तैयार करवाई और लाइसेंस जारी करवाए।