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नगर निगम ने हाई कोर्ट में कहा- 50 साल से स्वदेशी मिल की जमीन के मालिक हम हैं
सोफियारियल एस्टेट को स्वदेशी मिल की जमीन बेचने के मामले में नगर निगम ने हाई कोर्ट में पेश जवाब में कहा है 50 साल से हम जमीन के मालिक हैं। सरकारी रिकॉर्ड में भी नगर निगम का नाम दर्ज है। शासन ने सोफिया रियल एस्टेट को नीलामी में गलत तरीके से जमीन बेची है। एक जनहित याचिका को समाप्त करते हुए हाई कोर्ट ने ही कहा था कि नगर निगम चाहे तो नीलामी को जिला कोर्ट में चुनौती दे सकता है। कोर्ट के उस कथन के बाद ही नीलामी को दो साल पहले जिला कोर्ट में चुनौती दी है। सोफिया का हाई कोर्ट में यह केस लगाना ही गलत है।
सोफिया रियल एस्टेट ने हाई कोर्ट में याचिका लगा रखी है कि उसने शासन से नीलामी में यह जमीन खरीदी है। नगर निगम उसे आवासीय उपयोग के लिए मंजूरी नहीं दे रहा है। हाई कोर्ट यह आदेश दे कि नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव धारा 421 में नगर निगम द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को खुद करें। इधर, बुधवार को जिला प्रशासन ने भी इस मामले में अपना पक्ष रख दिया। प्रशासन की तरफ से भी लगभग यही कहा गया है कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन नगर निगम के नाम है। नगर निगम जब तक प्रारंभिक कार्रवाई नहीं करता तब तक जिला प्रशासन भी सोफिया को कोई अनुमति या दस्तावेज नहीं दे सकता। उल्लेखनीय है कि जमीन की नीलामी के बाद अभ्यास मंडल ने जमीन नगर निगम को वापस दिए जाने को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। तब हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि निगम चाहे तो शासन द्वारा की गई नीलामी के खिलाफ सिविल सूट दायर करे। निगम ने अब हाई कोर्ट में भी यही कहा कि सोफिया की याचिका खारिज की जाए। जब तक जिला कोर्ट से फैसला नहीं हो जाता तब तक इस याचिका का कोई मतलब नहीं है।
निगम ने जवाब में यह भी लिखा है कि जमीन की कीमत लगभग एक हजार करोड़ रुपए है, लेकिन इसकी नीलामी केवल सौ करोड़ में कर दी गई है। मिल के एग्रीमेंट में ही यह शर्त थी कि मिल यदि बंद हुई तो उसकी जमीन का मालिकाना हक नगर निगम का हो जाएगा।
एक हजार करोड़ की जमीन