पुलिस ने आईआईपीएस डायरेक्टर के बयान लिए
यूनिवर्सिटीके आईआईपीएस के कुछ दलित छात्रों को फीस जमा नहीं होने के कारण परीक्षा में नहीं बैठने देने का मामला तूल पकड़ गया है। छात्रों द्वारा अजाक थाने में की गई शिकायत के बाद बुधवार को पुलिस संस्थान पहुंची। यहां डायरेक्टर डॉ. आनंद सप्रे और प्रोफेसर रवींद्र यादव के बयान लिए गए। कर्मचारी नेता गजेंद्रसिंह परमार से भी बयान लिए। इधर, दो छात्रों के अभिभावकों ने पुलिस औैर यूनिवर्सिटी प्रबंधन को लिखित शिकायत की है कि हमसे जबरन फीस भरवाई गई, जबकि स्कॉलरशिप नहीं आने तक फीस जमा करना अनिवार्य नहीं है। छात्रों को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। कुलपति डॉ. डी.पी. सिंह ने भी डॉ. सप्रे से इस मामले में जवाब मांगा था, क्योंकि कुलसचिव और छात्र कल्याण संकाय के डीन के कहने के बाद भी उन्होंने तीन छात्रों को परीक्षा से वंचित कर दिया था। शिकायतकर्ता छात्रों औैर तेजप्रकाश राणे का कहना है जब तक विभागाध्यक्ष को पद से नहीं हटाया जाता तब तक लड़ाई जारी रहेगी।
यूनिवर्सिटीअलग से करवा सकती है जांच- इसपूरे मामले में यूनिवर्सिटी अलग से जांच करवा सकती है, क्योंकि डायरेक्टर ने भी कुछ दस्तावेज दिए हैं। कुलपति का कहना है मामले में फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।