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कोडवानी 72 घंटे कमिश्नर को साथ लेकर ट्रेंचिंग ग्राउंड पर बैठना चाहते हैं

7 वर्ष पहले
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शहरमें सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए हाई कोर्ट का आदेश एक ओर रह गया, जबकि नगर निगम और याचिकाकर्ता के बीच टकराव बढ़ गया है। याचिकाकर्ता किशोर कोडवानी अपनी मांगें मनवाने के लिए तीन दिन से धरने पर बैठे हैं। बुधवार को संभावना थी कि निगमायुक्त से बातचीत के बाद वह मान जाएंगे, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो पाई।

अब निगमायुक्त ने पुलिस को जानकारी दी है कि कोडवानी बिना अनुमति धरने पर बैठे हैं। इन्हें हटाओ। इस मुद्दे पर सफाई कर्मचारी संगठन भी नाराज है। कर्मचारियों का कहना है कि इन्हें नहीं उठाया तो गुरुवार से हम भी यहीं धरने पर बैठ जाएंगे।

याचिकाकर्ता की मांग

>निगम अफसर पहले लिखित में दें कि वह कब और क्या करेंगे?

> मेरे साथ 72 घंटे ट्रेंचिंग ग्राउंड में लाए जाने वाले कचरे की मॉनीटरिंग करें।

> 75 दिन तक किसी एक वार्ड में पूरे संसाधन और अमले के साथ सफाई व्यवस्था पर काम करें। इसकी रिपोर्ट पर आगे काम हो।

> दो अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए।

> एप सिस्टम लागू हो। कर्मचारी कचरा पेटी उठाने के बाद वहां का फोटो एप में डालें।

निगम के तर्क

>कोर्ट के आदेश पर याचिकाकर्ता के घर पत्र देने गए। उन्होंने लेने से मना कर दिया। अफसर ने पंचनामा भी बनाया।

> हमने दूसरे दिन बातचीत के लिए बुलाया और सुझाव लिए।

> हम याचिकाकर्ता को सभी क्षेत्र में घुमाने के लिए तैयार हैं।

> मॉनीटरिंग के लिए हमारा सिस्टम है।

> एक वार्ड में पूरा अमला या संसाधन नहीं लगा सकते। कोर्ट ने भी यही कहा है।

> कोर्ट ने छह हफ्ते का समय दिया है। उस अवधि में हम जवाब दे देंगे।

ये हैं कोर्ट के आदेश

>निगमायुक्त, याचिकाकर्ता और स्वास्थ्य अधिकारी को बैठक करना है। इसमें याचिकाकर्ता के सुझाव जानना हैं।

> इसके बाद याचिकाकर्ता जिन क्षेत्रों का दौरा करना चाहें, वहां स्वास्थ्य अधिकारी के साथ जा सकते हैं।

> इसके बाद निगमायुक्त अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेंगे।

> कलेक्टर सभी की संयुक्त बैठक लेंगे और दिशा-निर्देश देंगे।

> छह सप्ताह में कलेक्टर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में रखेंगे।

निगमायुक्त के कक्ष के बाहर धरने पर बैठे कोडवानी को बुधवार दोपहर कमिश्नर ने चर्चा के लिए बुलाया। समझौता नहीं हुआ तो कोडवानी तैश में उठकर चले गए।