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डीलर्स को मिल सकता है गाड़ी का नंबर देने का अधिकार

7 वर्ष पहले
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वाहनबेचने वाले डीलर्स को वाहनों के नंबर देने का अधिकार मिल सकता है। परिवहन विभाग डीलर्स पॉइंट इनरोलमेंट सिस्टम के तहत इस योजना पर विचार कर रहा है।

विभाग ने गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए 1 जनवरी 2014 से डीलर्स पॉइंट एनरोलमेंट सिस्टम लागू किया है। इससे पहले उसकी योजना थी कि डीलर्स वाहन बेचते वक्त वाहन के रजिस्ट्रेशन से जुड़े सभी दस्तावेज स्कैन कर अपने लॉग इन आईडी से विभाग को भेजेंगे। इसे ऑनलाइन एनरोलमेंट कहा जाएगा। इस व्यवस्था में डीलर्स को संबंधित वाहन की मौजूदा सीरीज में चल रहे रजिस्ट्रेशन नंबर भी दिखाई देंगे और वाहन मालिक को यहीं से नंबर भी दे दिया जाएगा। सिर्फ वीआईपी नंबरों की स्थिति में नंबर मिलने के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन से जोड़ा जाएगा। हालांकि कुछ अधिकारियों ने आपत्ति ली थी कि इस व्यवस्था से तो डीलर्स रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी बन जाएंगे, जो नियमानुसार गलत होगा। इसके चलते इस सिस्टम में डीलर्स को यह अधिकार नहीं दिया गया था। अब विभाग कुछ बदलावों के साथ इसे दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है।

आरटीओ एमपी सिंह ने बताया कुछ विशेषज्ञों का तर्क था कि यह अधिकार मिलने से डीलर्स ही रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी बन जाएंगे। इसे देखते हुए उच्चाधिकारियों से साथ चर्चा के बाद हल निकाला गया है। इसमें डीलर्स को सिर्फ इंस्पेक्शन अथॉरिटी के अधिकार दिए जाएंगे, जिसमें वह गाड़ी बेचते वक्त गाड़ी और उसके मालिक के सभी दस्तावेज का अपने स्तर पर जांच कर सत्यापन करेंगे। इसके आधार पर ही वह नंबर देंगे। नंबर के साथ ही गाड़ी का ऑनलाइन एनरोलमेंट किया जाएगा। इसके बाद आरटीओ में सिर्फ दस्तावेज को वेरिफाई करने के बाद उक्त नंबर के साथ गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कार्ड जारी किया जाएगा, जिसे डाक से मालिक को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया इस योजना को जल्द लागू करवाने का प्रयास हो रहा है।

रजिस्ट्रेशन नहीं, इंस्पेक्शन अथॉरिटी होंगे डीलर्स