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546 किसानों की मौत, बीमा था पर किसी को क्लेम नहीं

7 वर्ष पहले
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आलीराजपुरजिले के 546 किसान/आदिवासियों की मौत के बाद भी भारतीय जीवन बीमा निगम ने समूह बीमा योजना की बीमित राशि का भुगतान नहीं किया है। इन किसानों की 2010 से 2013 के बीच अलग-अलग कारणों से मौत हुई है। क्लेम की संख्या जब बढ़ती गई तो कलेक्टर शेखर वर्मा ने क्लेम दिलवाने की प्रक्रिया शुरू की। कलेक्टर ने पीड़ित परिवारों से निगम को वह सब दस्तावेज उपलब्ध करवाए जो निगम ने मांगे थे। लगभग ढाई महीने तक प्रक्रिया चलती रही, लेकिन निगम ने एक भी क्लेम मंजूर नहीं किया। अब राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में इन मामलों को रखा गया है। कलेक्टर के मुताबिक पौने 3 करोड़ रु. से ज्यादा का क्लेम मृत किसानों के परिवार को बंटना है। समूह बीमा योजना के तहत इन किसानों का बीमा किया गया था। बकायदा सभी की प्रीमियम भरी गई है। शेष-पेज 6 पर



इसकारिकाॅर्ड भी हमारे पास है। हमने क्लेम के लिए अपडेट रसीदें, मृत्यु प्रमाण पत्र, मौत का कारण सहित सभी दस्तावेज भेजे, लेकिन निगम ने एक भी प्रकरण नहीं माना। उनकी नजर में हमारे सारे क्लेम फर्जी हैं।

ऐसेबने थे सदस्य

कलेक्टरके मुताबिक एलआईसी ने ग्रामीणों को बीमा देने के लिए समूह बीमा योजना जारी की थी। शासन ने ग्रामीणों की ओर से प्रीमियम देना तय किया था। गांवों में महिला, पुरुषों की बीमा के लिए समितियां बनाई गईं। इनका बीमा किया गया। बीमित होने के बाद लोन दिए जाने का भी प्रावधान था। जिन्होंने लोन लिया उन्होंने बकाया किस्त भी चुकाई। जो असमर्थ थे उनका लोन शासन ने चुकाया। बाद में बीमित व्यक्ति मरते गए। उनके प्रकरण भी बने, लेकिन निगम ने मंजूर नहीं किए।

हरव्यक्ति को 50 हजार

इसयोजना में हर बीमित व्यक्ति को असामयिक मौत होने पर 50 हजार रुपए देने का प्रावधान है। किसानों को इसका सर्टिफिकेट भी निगम द्वारा दिया गया है। 546 किसानों के हिसाब से एलआईसी को दो करोड़ 73 लाख रुपए चुकाना है।

जिलाजज को भी पत्र लिखा

वर्माके मुताबिक आलीराजपुर के जिला जज को भी इस बारे में पत्र लिखा था। उन्होंने निगम को नोटिस देकर मामलों का निराकरण करने के लिए बुलाया, लेकिन निगम ने किसी अधिकारी को भेजने के बजाए कर्मचारी को भेज दिया। अब राष्ट्रीय लोक अदालत में 546 मामलों को रखा है। इन सभी में कलेक्टर खुद पार्टी बने हैं।



किसीकी बीमारी से, किसी की अटैक से मौत

जोबीमित व्यक्ति मारे गए हैं उनकी