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अपने दौर के कल्चर को रिफ्लेक्ट करता है म्यूज़िक
\\\"हरदौर के म्यूज़िक की अपनी खूबियां होती हैं। चाहे धुन हो, आवाज़ हो या फिर गीत के बोल ही क्यों हों। कुछ खास वाद्ययंत्र भी होते हैं। ये सब मिलकर एक खास दौर के कल्चर को अपने म्यूज़िक में रिफ्लेक्ट करते हैं। यही कारण है कि एक दौर का म्यूज़िक दूसरे दौर के म्यूज़िक से अलहदा होता है। आज का म्यूज़िक आज के दौर के कल्चर को रिफ्लेक्ट कर रहा है।\\\'
यह कहना है ख्यात पार्श्व गायिका अनुराधा पौड़वाल का। वे एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने रविवार को शहर में थी। इस मौके पर सिटी भास्कर ने उनसे खास बातचीत की।
सूफीम्यूज़िक है पसंद
अनुराधापौड़वाल ने कहा कि आज के दौर के म्यूजि़क में कुछ अच्छी फिमेल सिंगर्स हैं जो बहुत अच्छा गा रही हैं। इधर कुछ अच्छे सूफी गीत सुनने को मिले हैं। मुझे ये बहुत पसंद हैं। तेरे मस्त मस्त ये नैन जैसे गाने सुनो तो लगता है अच्छा संगीत बरकरार है। यह सोलफुल और मेलोडियस म्यूज़िक है।
सिंगर अनुराधा पौड़वाल एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने इंदौर एयरपोर्ट से देवास के लिए रवाना हुई।
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