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बिना रजिस्ट्रेशन शोरूम से नहीं मिलेगी गाड़ी

7 वर्ष पहले
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यह करना होगा रजिस्ट्रेशन के लिए

किसीको भी गाड़ी खरीदने जाते वक्त फोटो, एड्रेस प्रूफ और फोटो आईडी प्रूफ साथ में लेकर जाना होगा। डीलर्स आपके गाड़ी खरीदने पर गाड़ी से संबंधित कागजात एक-दो दिन में आरटीओ भेज देगा। इसके बाद आरटीओ से प्रक्रिया पूरी होने के बाद रजिस्ट्रेशन जारी किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में सात दिन का समय लगेगा। रजिस्ट्रेशन बनने पर डीलर्स द्वारा वाहन मालिक को सूचना दे दी जाएगी कि आप गाड़ी ले जा सकते हैं। गाड़ी फाइनेंस कराने की स्थिति में बैंक की प्रक्रिया अलग रहेगी।

व्यवस्था तब ही सफल जब प्रदेश में लागू हो

^यहव्यवस्था अच्छी है और सभी डीलर्स भी इसके समर्थन में हैं, लेकिन यह तब ही सफल हो पाएगी जब इसे पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किया जाए। क्योंकि इंदौर में डीलर्स अगर बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन देने से इनकार करेंगे तो ग्राहक दूसरे जिलों से वाहन ले लेगा, इससे डीलर का भी नुकसान होगा। वहीं ज्यादा बेहतर होगा ही जैसे पहले कहा गया था कि नंबर देने का अधिकार ऑनलाइन इनरोलमेंट सिस्टम के तहत डीलर को ही दे दिया जाएगा, अगर ऐसा होता है तो सारी समस्या हल हो जाएगी और गाड़ी बेचने के साथ ही डीलर वाहन पर नंबर भी देकर उसे डिलीवर करेगा।\\\' प्रवीणपटेल, अध्यक्षएसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स इंदौर

भास्कर संवाददाता | इंदौर

अगरआप किसी खास दिन नई गाड़ी घर लाना चाहते हैं तो इसकी तैयारी पहले से करना होगी, क्योंकि अब बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी गाड़ी को शोरूम से डिलीवर नहीं किया जाएगा। अगर कोई डीलर ऐसा करता है तो परिवहन विभाग उसका ट्रेड सर्टिफिकेट निलंबित कर देगा।

जिले के सभी वाहन डीलर्स को इस संबंध में नए आरटीओ एम.पी. सिंह ने सोमवार को नोटिस जारी किया है। आरटीओ सिंह ने बताया मोटर व्हीकल एक्ट में प्रावधान है कि बिना रजिस्ट्रेशन के गाड़ी नहीं चलाई जा सकती है। इसे लेकर शासन ने भी आदेश जारी किए थे कि कोई भी डीलर जब तक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हो वाहन मालिक को गाड़ी डिलीवर करें। इसके बाद भी यहां इस नियम का पालन नहीं हो रहा है और डीलर्स धड़ल्ले से बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन बेच रहे हैं।

शासन के पैसे का डीलर कर रहे इस्तेमाल- आरटीओ ने बताया इस पूरे मामले में शासन के पैसों का डीलर्स द्वारा उपयोग किए जाने का मामला भी सामने आता है, क्योंकि जब डीलर किसी को वाहन बेचता है तब ही वाहन मालिक से टैक्स