- Hindi News
- अंतर्मन में विराजित प्रभु से साक्षात्कार कराता है वेदांत
अंतर्मन में विराजित प्रभु से साक्षात्कार कराता है वेदांत
आपाधापीभरे इस दौर में वेदांत के मंत्र शांति और सुकून देते हैं। सत्य स्वरूप परमात्मा के निकट पहुंचाने और गति प्रदान करने में वेदांत का दर्शन महत्वपूर्ण है। मन को बाह्य जगत से मोड़कर अंदर की ओर प्रवृत्त करना ही आत्म कल्याण का संकेत है। संतों-विद्वानों के सान्निध्य में अंतर्मन में बैठे परमात्मा से साक्षात्कार कराना वेदांत का परम लक्ष्य है। वेदांत खुद से खुद की मुलाकात का मार्ग है।
यह बात महामंडलेश्वर कृष्णानंद तीर्थ ने सोमवार को अखंडधाम आश्रम में चल रहे 47वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन में कही। डॉ. रमेशाचार्य ने कहा- ज्ञान की प्राप्ति जाति-धर्म के आधार पर नहीं बल्कि कर्म, बुद्धि और विवेक से होती है। स्वामी हरियोगी ने कहा- मनुष्य जीवन वेदनाओं से घिरा हुआ है। इनका अंत वेदांत के चिंतन और मनन से होगा। महामंडलेश्वर जगदीशानंद ने कहा- संतों के दर्शन मात्र से पापों का क्षय होता है। आधी घड़ी का सत्संग भी मानव जीवन की दशा और दिशा बदल सकता है। साध्वी अर्चना देवी ने कहा- ज्ञान और भक्ति के मिलन से मन निर्मल होता है। महामंडलेश्वर डॉ. चेतन स्वरूप ने कहा- मन की एकाग्रता के बिना कर्मों में श्रेष्ठता आएगी और ही ज्ञान या भक्ति के क्षेत्र में। महामंडलेश्वर प्रणवानंद सरस्वती ने कहा- अज्ञान मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। हमें अपने आत्म स्वरूप का बोध नहीं होना भी अज्ञान है। अध्यक्ष हरि अग्रवाल ने बताया 9 दिसंबर को दोपहर 2 से 6 बजे तक प्रवचन होंगे। सम्मेलन में वृंदावन के भागवताचार्य स्वामी भास्करानंद भी आएंगे।